AQI 400 पार, GRAP की पाबंदियां भी बेअसर! आखिर क्यों दम घोंट रही दिल्ली की हवा? देखिए रिपोर्ट

नई दिल्ली। दिल्ली की हवा एक बार फिर लोगों की सेहत के लिए खतरा बन गई है। राजधानी में एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 400 के पार पहुंच गया है। सुबह और शाम के वक्त आसमान में धुंध की मोटी चादर दिखाई दे रही है। लोगों को आंखों में जलन, गले में खराश और सांस लेने में परेशानी हो रही है। हालात ऐसे हैं कि घर से बाहर निकलना भी मुश्किल होता जा रहा है। लेकिन सवाल यह है कि तमाम सरकारी प्रतिबंधों और उपायों के बावजूद दिल्ली की हवा साफ क्यों नहीं हो पा रही है?

*GRAP के प्रतिबंध, फिर भी प्रदूषण पर लगाम क्यों नहीं?*

प्रदूषण पर काबू पाने के लिए दिल्ली में ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) के तहत कई पाबंदियां लागू की गई हैं। निर्माण गतिविधियों पर रोक, वाहनों की जांच और सड़कों पर पानी का छिड़काव जैसे कदम उठाए जा रहे हैं। इसके बावजूद प्रदूषण का स्तर लगातार चिंता बढ़ा रहा है।

गुरुवार को पुरानी दिल्ली के चावड़ी बाजार में तीन मंजिला निर्माणाधीन इमारत ढहने का हादसा भी निर्माण गतिविधियों की निगरानी पर सवाल खड़े करता है। हालांकि, इस घटना को दिल्ली के प्रदूषण का सीधा कारण नहीं कहा जा सकता, लेकिन यह जरूर सवाल उठाती है कि प्रतिबंधों और निर्माण संबंधी नियमों का जमीनी स्तर पर कितना पालन हो रहा है।

*वाहनों पर सख्ती, PUC के बिना नहीं मिलेगा ईंधन*

वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए बिना वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUC) वाले वाहनों पर सख्ती की जा रही है। नियम के तहत ऐसे वाहनों को पेट्रोल-डीजल देने पर रोक लगाई गई है। इसके अलावा सड़कों पर पानी का छिड़काव और मेट्रो परिसरों सहित कई स्थानों पर स्प्रिंकलर लगाए जा रहे हैं, ताकि हवा में उड़ने वाली धूल को कम किया जा सके।

*कृत्रिम बारिश और वर्क फ्रॉम होम पर भी जोर*

प्रदूषण से निपटने के लिए आर्टिफिशियल रेन यानी कृत्रिम बारिश का विकल्प भी चर्चा में है। इसके साथ ही सरकारी और निजी कार्यालयों में वर्क फ्रॉम होम को बढ़ावा देने की बात कही जा रही है, ताकि सड़कों पर वाहनों का दबाव कम किया जा सके।

*सिर्फ वाहन और निर्माण नहीं, कई वजहों से बिगड़ती है हवा*

दिल्ली के प्रदूषण के पीछे एक नहीं, बल्कि कई कारण हैं। वाहनों और औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाला धुआं, निर्माण स्थलों की धूल, कचरा जलाना और आसपास के राज्यों में पराली जलाने की घटनाएं प्रदूषण में योगदान देती हैं। सर्दियों में हवा की रफ्तार कम होने और वातावरण में प्रदूषकों के फैलाव की स्थिति कमजोर पड़ने से प्रदूषण जमीन के करीब जमा होने लगता है। यही वजह है कि इस मौसम में हालात ज्यादा गंभीर हो जाते हैं।

*हर साल वही संकट, स्थायी समाधान कब?*

दिल्ली में हर साल सर्दियों के दौरान प्रदूषण का संकट गहराता है। प्रतिबंध लगाए जाते हैं, पानी का छिड़काव होता है और नए उपायों पर चर्चा शुरू होती है, लेकिन कुछ समय बाद हालात फिर बिगड़ने लगते हैं।

अब सवाल यह है कि प्रदूषण फैलाने वाले स्रोतों पर सालभर निगरानी क्यों नहीं होती? प्रतिबंधों का उल्लंघन करने वालों पर कितनी कार्रवाई हो रही है? दिल्ली को अस्थायी उपायों के साथ-साथ प्रदूषण के स्रोतों पर लगातार और प्रभावी कार्रवाई की जरूरत है, क्योंकि यह केवल पर्यावरण का मुद्दा नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की सेहत से जुड़ा सवाल है।

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