ट्रम्प की सत्ता को दोहरा झटका, अमेरिकी संसद के दोनों सदनों में डेमोक्रेट्स का बहुमत

वॉशिंगटन। अमेरिका के मध्यावधि चुनाव में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की रिपब्लिकन पार्टी को बड़ा सियासी झटका लगा है। चुनावी नतीजों में डेमोक्रेटिक पार्टी ने संसद के दोनों सदनों में बहुमत हासिल कर लिया है। इस हार से ट्रम्प प्रशासन के सामने आने वाले दिनों में राजनीतिक चुनौतियां बढ़ सकती हैं।

 

सीनेट में डेमोक्रेट्स को 54 सीटें

 

सीनेट की कुल 100 सीटों में से 35 पर इस बार चुनाव हुआ। उपलब्ध चुनावी आंकड़ों के अनुसार, डेमोक्रेटिक पार्टी के पास 54 सीटें पहुंच गई हैं, जबकि रिपब्लिकन पार्टी 43 सीटों पर है। बहुमत के लिए सीनेट में 51 सीटों की जरूरत होती है।

 

हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में भी बदला समीकरण

 

अमेरिकी संसद के निचले सदन हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स की सभी 435 सीटों पर मतदान हुआ। यहां भी डेमोक्रेटिक पार्टी ने बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया है। बहुमत के लिए 218 सीटें जरूरी हैं। शुरुआती चुनावी आंकड़ों में डेमोक्रेट्स को 218 से अधिक सीटें मिलती दिखाई दीं।

 

गवर्नर चुनाव : 22 राज्यों में डेमोक्रेट्स की जीत

 

अमेरिका में इस बार 36 राज्यों के गवर्नर पदों के लिए भी चुनाव हुए। उपलब्ध नतीजों के मुताबिक, 34 राज्यों के परिणाम सामने आ चुके हैं। इनमें डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवारों ने 22 राज्यों में जीत दर्ज की, जबकि रिपब्लिकन पार्टी को 12 राज्यों में सफलता मिली। दो राज्यों में मतगणना जारी थी।

 

अब्दुल अल-सैयद की जीत बनी चर्चा का विषय

 

मिशिगन से डेमोक्रेटिक उम्मीदवार अब्दुल अल-सैयद की जीत ने भी अमेरिकी चुनाव को खास बना दिया है। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक, वह अमेरिकी इतिहास में सीनेटर चुने जाने वाले पहले मुस्लिम बने हैं। चुनाव प्रचार के दौरान राष्ट्रपति ट्रम्प ने उन पर तीखे व्यक्तिगत हमले किए थे। एक रैली में ट्रम्प ने उन्हें ‘जिहादी’ तक कह दिया था और मुस्लिम ब्रदरहुड से जुड़ा होने का आरोप लगाया था।

 

ट्रम्प के लिए आगे की राह मुश्किल

 

संसद के दोनों सदनों में विपक्षी पार्टी के बहुमत का असर ट्रम्प प्रशासन के कामकाज पर पड़ सकता है। बजट, नए कानूनों और सरकारी नीतियों को लेकर डेमोक्रेट्स की भूमिका मजबूत होगी। साथ ही राष्ट्रपति के फैसलों पर संसद में सवाल और निगरानी भी बढ़ सकती है।

 

अमेरिकी मिडटर्म चुनाव के नतीजों ने साफ कर दिया है कि ट्रम्प के लिए अपने दूसरे कार्यकाल में राजनीतिक सहमति बनाना अब पहले से ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

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