सतना : जिले भर में इन दिनों बिजली विभाग की कार्यप्रणाली उपभोक्ताओं के लिए सिरदर्द बन चुकी है. मेंटेनेंस के नाम पर घंटों शटडाउन और बिना पूर्व सूचना के की जा रही अघोषित बिजली कटौती से आम जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है. हालात यह हैं कि शहर में भले ही आपूर्ति को कागजों और व्यवस्था में संतुलित दिखाने की कोशिश की जा रही लेकिन ग्रामीण अंचल में दिन-रात हो रही कटौती ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है.
मिली जानकारी के अनुसार बिजली विभाग की ओर से जिले को आवश्यकता के अनुसार पर्याप्त विद्युत आवंटन ही नहीं मिल पा रहा है. सप्लाई कम होने के कारण विभाग लोड शेडिंग का सहारा ले रहा है. जिसका सीधा असर गांवों और कस्बों पर पड़ रहा है.
शहर में बिजली की आपूर्ति को संतुलित किया जा रहा और ग्रामीण क्षेत्रों में आए दिन घंटों बिजली गुल रहना अब आम बात हो गई है. ग्रामीणों का कहना है कि 24 घंटे में से बमुश्किल 8 से 10 घंटे ही बिजली मिल पा रही है वह भी टुकड़ों में. लो-वोल्टेज और बार-बार ट्रिपिंग के कारण घरों के इलेक्ट्रॉनिक उपकरण फुंक रहे हैं. किसानों के लिए सिंचाई का संकट खड़ा हो गया है. वहीं छोटे घरेलू व कुटीर उद्योग ठप होने की कगार पर पहुंच गए हैं.
बिजली की आंख-मिचौली से पढ़ाई कर रहे छात्र-छात्राओं की दिनचर्या बुरी तरह प्रभावित हो रही है. दूसरी ओर व्यापारिक प्रतिष्ठानों में जनरेटर और इनवर्टर के सहारे काम चलाना पड़ रहा है जिससे व्यापारियों का खर्च बढ़ रहा है.
मेंटेनेंस बना केवल बहाना
उपभोक्ताओं का आरोप है कि विभाग हर हफ्ते मेंटेनेंस के नाम पर लंबा कट लगाता है.फिर भी हल्की हवा या बूंदाबांदी होते ही घंटों आपूर्ति ठप हो जाती है.जब स्थानीय सब-स्टेशनों पर संपर्क किया जाता है. तो अमूमन फोन रिसीव नहीं होते या फिर ‘ऊपर से सप्लाई बंद है’ कहकर पल्ला झाड़ लिया जाता है
