भोपाल: राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) की भोपाल स्थित केंद्रीय क्षेत्र पीठ ने कालियासोत और केरवा तालाबों के एफटीएल (पूर्ण ताल स्तर), 50 मीटर और 33 मीटर क्षेत्र के सीमांकन तथा अतिक्रमण संबंधी अभिलेखों की जांच जिला संरक्षण समिति से कराने के निर्देश दिए हैं. समिति कलेक्टर की अध्यक्षता में आर्द्रभूमि संरक्षण एवं प्रबंधन नियम, 2017 के तहत आपत्तियां आमंत्रित कर उनका निराकरण करेगी. इसके बाद नियमानुसार अधिसूचना की प्रक्रिया पूरी की जाएगी. एनजीटी ने 29 अक्टूबर को डॉ. सुभाष सी. पांडेय की आवेदन संख्या 07/2022 और 12/2022 पर सुनवाई करते हुए ये निर्देश दिए. पीठ में न्यायिक सदस्य न्यायमूर्ति श्यो कुमार सिंह और विशेषज्ञ सदस्य सुधीर कुमार चतुर्वेदी शामिल थे.
-डिजिटल सर्वे रिपोर्ट की चार प्रतियां सुरक्षित रहेंगी
सुनवाई में राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से बताया गया कि जिला मजिस्ट्रेट ने भूमि एवं स्थलाकृतिक सर्वेक्षण, जीआईएस और कैडस्ट्रल मैपिंग के लिए प्रमाणित एजेंसी से सर्वे कराया है. एजेंसी ने कालियासोत और केरवा जलाशयों का तकनीकी कार्य पूरा कर रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी है. रिपोर्ट में एफटीएल का निर्धारण, ग्राउंड ट्रुथिंग, जियो-टैगिंग, ड्रोन सर्वेक्षण, उपग्रह चित्र, ऑर्थोमोजेक मानचित्र और जलाशयों की सीमाओं का डिजिटल सीमांकन शामिल है. सर्वे की वीडियोग्राफी भी डिजिटल माध्यम से प्रस्तुत की गई है. अधिकरण ने डिजिटल रिपोर्ट की चार पेन ड्राइव तैयार कर राज्य आर्द्रभूमि प्राधिकरण, भोपाल नगर निगम आयुक्त, कलेक्टर और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव को सौंपने के निर्देश दिए. संबंधित मानचित्रों और तकनीकी दस्तावेजों की हार्ड कॉपी आवेदक को भी उपलब्ध कराई जाएगी.
-आर्द्रभूमियों की अधिसूचना नहीं होने पर चिंता
सुनवाई में राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने बताया कि मध्यप्रदेश की आर्द्रभूमियां अब तक नियमों के अनुसार अधिसूचित नहीं की गई हैं. इस पर आवेदक ने पर्यावरण मंत्रालय के दिशानिर्देशों का पालन सुनिश्चित करने की मांग की. एनजीटी ने कहा कि आर्द्रभूमियों की व्यापक सूची तैयार करना, उनकी सीमाएं और प्रभाव क्षेत्र निर्धारित करना तथा डिजिटल अभिलेख तैयार करना आवश्यक है. प्रत्येक आर्द्रभूमि के लिए एकीकृत प्रबंधन योजना बनाई जानी चाहिए. अधिकरण ने स्पष्ट किया कि आर्द्रभूमियों का उपयोग ऐसा नहीं होना चाहिए, जिससे जल संग्रहण क्षमता, जल गुणवत्ता, जैव विविधता और प्राकृतिक तटरेखा प्रभावित हो. अतिक्रमण और भूमि उपयोग में अवैध परिवर्तन रोकने के लिए आर्द्रभूमियों को भू-राजस्व अभिलेखों में दर्ज करने की प्रक्रिया भी सुनिश्चित की जाए. एनजीटी ने निर्देश दिए कि सर्वे एजेंसी को 3,82,320 और 4,06,448 रुपये की राशि पर्यावरण क्षतिपूर्ति निधि से भुगतान की जाए. भुगतान हार्ड और सॉफ्ट कॉपी सौंपने तथा एजेंसी द्वारा अतिरिक्त प्रतियां नहीं रखने का प्रमाण पत्र देने के बाद किया जाएगा. अभिलेखों का मुख्य संरक्षक राज्य आर्द्रभूमि प्राधिकरण का सदस्य सचिव होगा.
