नयी दिल्ली, 02 नवंबर (वार्ता) केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने सोमवार को जम्मू-कश्मीर के उच्च भूकंपीय जोखिम वाले किश्तवाड़ में नयी भूकंपीय वेधशाला का उद्घाटन किया। डॉ. सिंह ने इस अवसर पर कहा कि वर्ष 2014 के बाद जम्मू-कश्मीर में मौसम निगरानी और आपदा प्रबंधन से जुड़े वैज्ञानिक बुनियादी ढांचे का व्यापक विस्तार किया गया है। उन्होंने लोगों से मौसम विभाग की वैज्ञानिक चेतावनियों और पूर्वानुमानों को गंभीरता से लेने तथा उनके अनुरूप प्रशासन का सहयोग करने की अपील की। उन्होंने बताया कि क्षेत्र में डॉप्लर मौसम राडार की संख्या शून्य से बढ़कर चार हो गयी है और चार नये राडार लगाने की प्रक्रिया जारी है। वर्ष 2027 में डोडा, किश्तवाड़, अनंतनाग और बारामूला में भी चार रडार चालू किये जायेंगे।
उन्होंने बताया कि किश्तवाड़ की नयी भूकंपीय वेधशाला अत्याधुनिक डिजिटल उपकरणों से लैस है। यहां से भूकंप संबंधी आंकड़े वास्तविक समय में नयी दिल्ली स्थित राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के 24 घंटे संचालित निगरानी केंद्र को भेजे जाएंगे। इसके साथ ही जम्मू-कश्मीर में भूकंपीय वेधशालाओं की संख्या चार हो गयी है, जो जम्मू, श्रीनगर, उधमपुर और किश्तवाड़ में स्थापित हैं। उन्होंने कहा कि इससे भूकंप की गतिविधियों पर लगातार नजर रखने, क्षेत्र के भूकंपीय जोखिमों को समझने तथा जिला प्रशासन और बचाव दलों को आपात स्थिति में बेहतर तैयारी करने में मदद मिलेगी। मौसम निगरानी के लिए स्वचालित मौसम केंद्रों की संख्या भी तीन से बढ़ाकर 12 कर दी गयी है। इनमें किश्तवाड़ में चार, डोडा और रामबन में दो-दो तथा कठुआ में एक केंद्र शामिल है। वर्षा मापक केंद्रों की संख्या भी नौ से बढ़ाकर 15 की गयी है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि मौसम संबंधी चेतावनी तभी प्रभावी साबित होती है, जब लोग उसका पालन भी करें। उन्होंने कहा कि सूचना प्राप्त करना जितना महत्वपूर्ण है, उतना ही जरूरी उसके अनुसार कार्रवाई करना भी है। उन्होंने मौसम संबंधी अफवाहों और अपुष्ट जानकारियों से बचने तथा वैज्ञानिक आकलन पर भरोसा करने की अपील की।

