इंदौर:स्वच्छता लीग में इंदौर को सोर्स सेमीग्रेशन ने सिरमौर बनने में अहम भूमिका निभाई है. सोर्स सेमीग्रेशन में इंदौर को 98 प्रतिशत अंक मिले है, जबकि सूरत को 92 और अहमदाबाद को 94 प्रतिशत अंक मिले है. इस तरह टोटल कुल अंको में से 99.75 प्रतिशत अंक हमारे विजेता बनने का आधार बने हैं.
क्या सोर्स सेमीग्रेशन?
विभिन्न तरह के गीले सूखे कचरे में से कांच, कपड़ा, प्लास्टिक, खाद्य पदार्थ, चमड़ा, रेपर्स और अन्य रूप का कचरा अलग अलग करने की प्रोसेस की जाती है. इस प्रोसेस में खाद्य बनाने लायक कचरा अलग किया काट है. उसमें गीला और सूखे कचरे की सोर्स सेमीग्रेशन भी अलग होती है. खास बात यह है कि कांच, प्लास्टिक, चमड़े, रेपर का री यूज यानी पुनः उपयोग किया जा रहा है.
दूसरे शहरों के मेंटर
स्वच्छता में पूरे देश में इंदौर ने पीएचडी हासिल कर ली है. हम स्वच्छता के सभी नवाचार कर रहे है. नित नए आयाम से इंदौर देश में अब दूसरे शहरों को सफाई सीख देगा. उन शहरों का मेंटर बनेगा. अभी हम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकसभा सीट वाराणसी के मेंटर बनने जा रहे है. इसके बाद डेढ़ के कई राज्यों से सफाई मॉडल विकसित करने का काम इंदौर नगर निगम को मिलने की संभावना है.
रात और दिन सफाई व्यवस्था का परिणाम
इंदौर सुपर स्वच्छता लीग में इंदौर का टॉप पर आना अपर आयुक्त अभिलाष मिश्रा के मैनेजमेंट का बड़ा महत्व है. उन्होंने अलग अलग क्षेत्रों में रात और दिन मशीन और सफाईकर्मियों के साथ विशेष योजना बनाकर विभिन्न स्थानों पर मशीन और मैनुअल सफाई करवाई. ड्रेनेज हो या पानी की लाइन इस पर बहुत ध्यान दिया गया. रात सड़कों पर मशीन से ब्रशिंग और डिवाइडर की प्रेशर से धुलाई सब पर नजर रखी गई. इसके साथ ही कचरा गाड़ियों का रिप्लेसमेंट और गाड़ियों के मैकेनिकल वर्क पर भी फोकस किया. सबसे बड़ी बात सफाईकर्मियों और मशीनरी टूल्स के बीच सामंजस्य स्थापित कर सफाई के मिशन का रूप दिया और आज इंदौर नंबर वन पर बरकरार है. यह सब अपर आयुक्त अभिलाष मिश्रा की कार्य प्रणाली से संभव हुआ है.
कचरे से बनी गैस में एशिया का सबसे बड़ा सीएनजी प्लांट
इंदौर ऐसे ही नंबर वन नहीं आ रहा है. इंदौर देवगुराडिया स्थित कचरा प्रोसेसिंग प्लांट पर निगम द्वारा एशिया का सबसे बड़ा सीएनजी प्लांट कार्य कर रहा है. पहले इसकी क्षमता 550 मिट्रिक टन की थी, जो अब 860 मिट्रिक टन कचरा प्रोसेस होने से बायो सीएनजी गैस का निर्माण हो रहा है. उक्त गैस से बड़ा हिस्सा निगम द्वारा संचालित सिटी बसों में उपयोग किया जा रहा है. इससे निगम को करोड़ों रुपए के बचत हो रही है.
अलग-अलग स्थानों पर कचरा स्टेशन और एसटीपी प्लांट
इंदौर में नगद निगम ने अलग अलग स्थानों पर कचरा स्टेशन बनाकर कचरे का प्रोसेस किया जा रहा है. हर स्टेशन पर पांच से आठ वार्डो का चारा एकत्र किया जाता है. वहां से फिर आगे बड़ी गाड़ियों में प्रोसेसिंग यूनिट भेजा जाता है. शहर में ड्रेनेज सिस्टम कर लिए अलग अलग क्षेत्रों में एसटीपी प्लांट स्थापित किए गए है, जिनमें गंदे पानी को साफ कर रियूज किया जा रहा है.
वॉटर प्लस सिटी का तमगा और सेवन स्टार रेंकिंग भी हासिल
नगर निगम इंदौर वॉटर प्लस सिटी का तमगा भी बरकरार रखने में कामयाब रहा है. इसकी वजह है कि शहर में कान्ह सरस्वती नदी में आउटलेट बंद कर समांतर सिवरेज लाइन डालना है. दूसरा शहर जल स्रोत कुएं, बावड़ी और तालाब का बड़े पैमाने पर सफाई कर पुनः शुद्ध जल स्त्रोत बदलना है. वहीं सेवन स्टार रेंकिंग में सफाई के सभी मानकों और व्यवसायिक प्रतिष्ठानों से भागीदारी कर कचरे से लेकर सड़क तक सफाई का विशेष ध्यान दिया. इससे हमारी रेंकिंग यथावत रही है.
