नई दिल्ली, 02 नवम्बर (वार्ता) सरकार विदेशी नागरिकों के पंजीकरण और आव्रजन संबंधी सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए देश में विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालयों का विस्तार कर रही है और वर्ष 2027 तक सभी राज्यों की राजधानियों में ये कार्यालय स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। अभी देश में इन कार्यालयों की संख्या 20 पहुंच गई है। गृह मंत्रालय ने सोमवार को बताया कि इस योजना के तहत वर्ष 2025 में जयपुर, चंडीगढ़ और गुवाहाटी में तीन नए कार्यालय खोले गए हैं। इस वर्ष मिजोरम की राजधानी आइजोल और आंध्र प्रदेश की राजधानी अमरावती में दो और कार्यालय स्थापित किए गए हैं। इसके अलावा नगालैंड के कोहिमा, त्रिपुरा के अगरतला और ओडिशा के भुवनेश्वर में तीन नए कार्यालय अधिसूचित किए गए हैं।
सरकार का कहना है कि पर्यटन, चिकित्सा और शिक्षा के लिए भारत आने वाले विदेशी नागरिकों की संख्या बढ़ने के साथ इन कार्यालयों का विस्तार जरूरी हो गया है। इसका उद्देश्य विदेशियों को स्थानीय स्तर पर बेहतर सेवाएं देना, वीजा संबंधी काम आसान करना और इमिग्रेशन नियमों का पालन सुनिश्चित करना है। ये कार्यालय विदेशियों के भारत में ठहरने और उनके प्रवास से जुड़े नियमों की निगरानी करते हैं। ये पात्र विदेशी नागरिकों का पंजीकरण करने, आवासीय परमिट जारी करने, वीजा अवधि बढ़ाने या उसमें बदलाव करने और संरक्षित तथा प्रतिबंधित क्षेत्रों में जाने की अनुमति देने जैसे काम करते हैं। जरूरत पड़ने पर भारत छोड़ने के लिए निकास परमिट भी जारी किए जाते हैं।
सरकार की योजना बिहार, गोवा, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर और मेघालय में भी इस तरह के कार्यालय स्थापित करने की है। इसके लिए काम किया जा रहा है। विदेशी नागरिकों के लिए ई-विदेश पंजीकरण कार्यालय पोर्टल के जरिए 35 ऑनलाइन सेवाएं भी उपलब्ध हैं। इनके माध्यम से पंजीकरण, वीजा विस्तार, वीजा में बदलाव और अन्य पात्र आव्रजन सेवाओं का लाभ लिया जा सकता है। सरकार के अनुसार, इन कार्यालयों का विस्तार विदेशी नागरिकों को सुविधा देने के साथ आव्रजन (इमिग्रेशन) कानूनों और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी जरूरतों को पूरा करने में भी मदद करेगा।

