जबलपुर:मप्र हाईकोर्ट में सोमवार को सोम डिस्टिलरीज का लाइसेंस निरस्त करने के मामले में उभय पक्षों के तर्क पूरे हो गये। जस्टिस विवेक अग्रवाल की एकलपीठ ने मामले पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व जस्टिस विशाल मिश्रा और जस्टिस संदीप एन भट्ट की एकलपीठों ने मामले पर सुनवाई से इंकार कर दिया था। इसके बाद चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा के आदेश पर मामला जस्टिस विवेक अग्रवाल की एकलपीठ में नियत किया गया था।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद विगत 20 मार्च को भी मामले पर सुनवाई हुई थी।दरअसल, मध्य प्रदेश शासन ने 4 फरवरी को शराब कंपनी सोम डिस्टिलरीज के दो लाइसेंस निरस्त कर दिए थे। जिसे लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई। तत्कालीन आबकारी आयुक्त अभिजीत अग्रवाल ने सोम डिस्टिलरीज के सभी लाइसेंस निलंबित कर दिए थे। रायसेन जिले में स्थित सोम डिस्टिलरीज एंड ब्रेवरीज लिमिटेड और मेसर्स सोम डिस्टिलरीज प्राइवेट लिमिटेड का लाइसेंस आबकारी आयुक्त ने सस्पेंड कर दिया है।
तत्कालीन आबकारी आयुक्त अभिजीत अग्रवाल द्वारा जारी आदेश के अनुसार कंपनियों के संचालक, प्रतिनिधि, अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता व कर्मचारियों के विरुद्ध अपर सत्र न्यायालय, देपालपुर जिला इंदौर के एक प्रकरण में पारित निर्णय के आधार पर कार्रवाई की गई थी। इसमें कहा गया है कि हाईकोर्ट की इंदौर पीठ द्वारा संबंधित आपराधिक अपीलों में सजा के क्रियान्वयन पर रोक लगाई गई है, लेकिन दोषसिद्धि अभी भी प्रभावी है। मामले में याचिकाकर्ता कंपनी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता नमन नागरथ ने पक्ष रखा, जिन्होंने सरकार की कार्रवाई को पूरी तरह से अनुचित बताया।
