जनरल ड्यूटी आरक्षकों को बैंड बजाने नहीं कर सकते विवश : हाईकोर्ट

जबलपुर। हाईकोर्ट के जस्टिस विवेक जैन की एकलपीठ ने अपने एक अहम आदेश में स्पष्ट किया है कि पुलिस बल के जनरल ड्यूटी आरक्षकों को उनकी सहमति के बिना पुलिस बैंड का प्रशिक्षण दिलाना या बैंड की ड्यूटी देना उचित नहीं है। न्यायालय ने कहा है कि पुलिस बल में नियुक्त जनरल आरक्षकों की प्राथमिक जिम्मेदारी कानून-व्यवस्था बनाए रखना और अपराध की जांच करना है, इसलिए उन्हें संगीत दल यानि बैंड बजाने के लिए बाध्य करना उनके मूल कत्र्तव्य से भटकाना है।

याचिकाकर्ता मुकुेश कुमार रावत सहित अन्य पुलिसकर्मी वर्तमान में आरक्षक के पद पर पदस्थ हैं। उन्हें विभाग द्वारा पुलिस बैंड का प्रशिक्षण दिया गया और विभिन्न सरकारी व सामाजिक कार्यक्रमों में प्रदर्शन करने के लिए भेजा गया। जिस पर हाईकोर्ट की शरण ली गई। जिसमें कहा गया कि यह ड्यूटी उनकी नियुक्ति के अनुरूप नहीं है। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता नित्यानंद मिश्रा ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि आरक्षकों की भर्ती मुख्यत: नियमित पुलिसिंग ड्यूटी (कानून व्यवस्था, अपराध जांच, गश्त आदि) के लिए की जाती है। उन्हें बैंड बजाने के लिए भेजना उनकी सेवा शर्तों और संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है। हाईकोर्ट ने पहले भी रिट याचिका में यह निर्णय दिया था कि पुलिस कर्मियों को उनकी सहमति के बिना बैंड ड्यूटी पर नहीं लगाया जा सकता। वहीं राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि पुलिस एक अनुशासित बल है, जिसमें समय-समय पर विभिन्न प्रकार के प्रशिक्षण अनिवार्य होते हैं। पुलिस बैंड विभाग की परंपरा, अनुशासन और गरिमा का हिस्सा है। हाईकोर्ट की ग्वालियर पीठ द्वारा एक मामले में यह माना गया था कि विशेष सशस्त्र बल जैसी इकाइयों को ऐसे प्रशिक्षण देना विभागीय अधिकार है। विभागीय आवश्यकता और सरकारी कार्यक्रमों में पुलिस बैंड की भूमिका अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा यह सही है कि पुलिस बल के अलग-अलग अंगों की अलग जिम्मेदारियां होती हैं। एसएएफ जैसी इकाइयों को अन्य प्रशिक्षण दिए जा सकते हैं, लेकिन जनरल ड्यूटी आरक्षकों की मूल ड्यूटी कानून व्यवस्था और अपराध की जांच से जुड़ी होती है। पिछले आदेश के अनुसार, जनरल ड्यूटी आरक्षकों को उनकी इच्छा के विरुद्ध बैंड प्रशिक्षण या बैंड ड्यूटी पर नहीं लगाया जा सकता। चूंकि याचिकाकर्ता पहले ही प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हैं, अत: भविष्य में उन्हें केवल उनकी सहमति से ही बैंड ड्यूटी पर भेजा जाए।

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