
जबलपुर। मप्र हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा व जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने भोपाल ऐशबाग ब्रिज मामले में ठेका कंपनी के विरुद्ध ब्लैकलिस्ट कार्रवाई निरस्त करने करने के संबंध में जानकारी तलब की है। इससे पूर्व राज्य शासन की ओर से अवगत कराया गया कि ठेका कंपनी के विरुद्ध कार्रवाई के संबंध में पुनर्विचार जारी है। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 25 सितंबर को नियत की है।
दरअसलए 90 डिग्री ब्रिज के नाम पर ठेका कंपनी मेसर्स पुनीत चड्ढा को ब्लैकलिस्ट किए जाने के विरुद्ध याचिका दायर की गई है। जिस पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने मौलाना आजाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान सिविल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर्स की रिपोर्ट तलब की थी। जिसके प्रस्तुत होने के बाद साफ हो चुका है कि वास्तव में ब्रिज लोकनिर्माण विभाग के मेप के अनुरूप 118-119 डिग्री का बना है। इसलिए ठेकेदार पर तोहमत अनुचित है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता सिद्धार्थ कुमार शर्मा व प्रवीण दुबे ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि भोपाल के ऐशबाग एरिया में ब्रिज निर्माण का ठेका 2021-22 में मिला था। नियत निर्माण 18 माह में किया जाना था। ब्रिज का जीएडी सरकारी एजेंसी के द्वारा जारी किया गया था। इसके बाद जीएडी में साल 2023 व 2024 में उसमें संशोधन किया गया। सरकारी एजेंसी के द्वारा उन्होने ब्रिज का निर्माण किया गया था। ब्रिज में 90 डिग्री का मोड़ होने के कारण दुर्घटना होने की आशंका का हल्ला मचने के बाद सरकार ने जांच के लिए पांच सदस्यीय कमेटी का गठन किया था। जांच कमेटी ने पाया कि ब्रिज के जिस हिस्से में मोड़ बना है, उसके नीचे से रेल पटरी निकल रही है। राज्य सरकार तथा रेलवे विभाग में सामंजस्य की कमी थी। इसके अलावा ब्रिज के खम्बे को निर्धारित दूरी में नहीं लगाए गए हैं। जांच कमेटी के रिपोर्ट के आधार पर सुनवाई का अवसर प्रदान किए बिना ही उनकी कंपनी को सरकार की ओर से ब्लैक लिस्ट कर दिया गया है। ब्रिज का मोड 90 डिग्री नहीं बल्कि 118-119 डिग्री है। हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए अपने अंतरिम आदेश में कहा था कि याचिकाकर्ता ठेकेदार कंपनी के विरुद्ध कोई सख्त कार्यवाही न की जाए। मौलाना मौलाना आजाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान के प्रोफेसर ब्रिज कितने डिग्री का बना है, इसकी जांच कर रिपोर्ट पेश करें। प्रोफेसर को फीस के रूप में याचिकाकर्ता एक लाख रुपये प्रदान करें व संसाधन नगर निगम भोपाल उपलब्ध कराये। याचिकाकर्ता का दावा सही पाए जाने पर वह फीस की राशि वसूलने का अधिकारी होगा। विगत सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट को बताया गया कि पूर्व में पारित आदेशानुसार मैनिट के सिविल इंजीनियरिंग विभाग ने ब्रिज में बने मोड की जांच की। उनकी रिपोर्ट के अनुसार ब्रिज का मोड़ 118-119 डिग्री के बीच हैं। सरकार की ओर से बताया गया था कि कंपनी के विरुद्ध की गई कार्यवाही को निरस्त करने पर विचार जारी है।
