नई दिल्ली, देश के कर्जदारों और आम नागरिकों की जेब पर जल्द ही बड़ा वित्तीय बोझ पड़ सकता है। बैंक ऑफ बड़ौदा (BoB) की ओर से जारी एक ताजा आर्थिक रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) बढ़ती महंगाई और बाजार में मौजूद नकदी को नियंत्रित करने के लिए चालू चक्र में प्रमुख ब्याज दरों में कुल 0.50 से 0.75 प्रतिशत (50-75 बीपीएस) तक की और वृद्धि कर सकता है। इससे पहले केंद्रीय बैंक ने करीब चार साल में पहली बार नीतिगत दरों में 0.25% की बढ़ोतरी करते हुए अपने रुख को ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ में बदला था, जिसके बाद अब ऋण दरों में और तेजी आने की पूरी संभावना जताई जा रही है।
त्योहारी सीजन में मजबूत रही उपभोक्ता मांग और आर्थिक गतिविधियां, लेकिन कमजोर मानसून ने कृषि और खाद्य महंगाई पर बढ़ाई चिंता
BoB की रिपोर्ट में बताया गया है कि सितंबर माह के दौरान फेस्टिव सीजन के चलते ऑटोमोबाइल बिक्री, इलेक्ट्रॉनिक्स और गैर-तेल व गैर-स्वर्ण आयात में शानदार तेजी दर्ज की गई है। बिजली की मांग और स्टील की खपत भी आर्थिक गतिविधियों के मजबूत होने की गवाही देती है। हालांकि, रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी गई है कि अल नीनो के प्रभाव से इस वर्ष दक्षिण-पश्चिम मानसून सामान्य से 13 फीसदी कम रहा है, जिससे जलाशयों में जल स्तर घटने और खरीफ फसलों की पैदावार प्रभावित होने की आशंका है। कृषि क्षेत्र की इस कमजोरी के कारण आने वाले दिनों में खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर फिर से दबाव बढ़ सकता है।
राजकोषीय घाटे में सुधार और प्रत्यक्ष कर संग्रह में हुई अच्छी बढ़ोतरी, सरकार के राजस्व मोर्चे पर राहत के मिले हैं सकारात्मक संकेत
एक तरफ जहां मौद्रिक मोर्चे पर ब्याज दरें बढ़ने की अटकलें हैं, वहीं दूसरी तरफ सरकारी खजाने के मोर्चे पर कुछ राहत भरी खबरें भी सामने आई हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, सितंबर 2026 तक केंद्र सरकार का राजकोषीय घाटा सुधरकर 4.4 प्रतिशत पर आ गया है, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 5.1 प्रतिशत था। चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही (अप्रैल से सितंबर) के दौरान सरकार के कुल राजस्व में 3.6 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है, जिसमें 13.1 प्रतिशत की मजबूत दर से बढ़े डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन का अहम योगदान रहा है। हालांकि, इनडायरेक्ट टैक्स में आई गिरावट और 10.7% की तेज रफ्तार से हो रहे सरकारी खर्च के बीच आरबीआई के आगामी नीतिगत निर्णयों पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।

