भारतीय मुक्केबाजों ने 14 पदक जीत कर टैमर टूर्नामेंट की तालिका में शीर्ष स्थान हासिल किया

टैम्परे, (फिनलैंड) 02 नवंबर (वार्ता) टैमर टूर्नामेंट 2026 में भारतीय मुक्केबाजों ने कुल चार स्वर्ण, दो रजत और आठ कांस्य पदक जीतकर पदक तालिका में शीर्ष स्थान हासिल किया। इस वार्षिक टूर्नामेंट में रविवार को अरुंधति चौधरी, आरती धरियाल, अंकुशिता बोरो और पवन बर्तवाल ने चार स्वर्ण पदक जीते। टैम्परे बॉक्सिंग एसोसिएशन द्वारा आयोजित यह टूर्नामेंट 1977 से हर साल हो रहा है। इस बार इसमें भारत की 14 सदस्यीय टीम ने हिस्सा लिया, जिसमें देश की ओलंपिक वेट-कैटेगरी (वजन वर्ग) में तीसरे स्थान पर रहने वाले मुक्केबाज शामिल थे।

कॉमनवेल्थ गेम्स की स्वर्ण पदक विजेता अरुंधति चौधरी ने 70 किग्रा वर्ग में स्वर्ण पदक जीता, जबकि आरती धरियाल ने 54 किग्रा और अंकुशिता बोरो ने 65 किग्रा वर्ग में महिला खिताब अपने नाम किए।
पुरुषों के 55 किग्रा वर्ग में जीत हासिल कर पवन बर्तवाल ने भारत के स्वर्ण पदकों की संख्या में एक और इजाफा किया। फाइनल में आरती धरियाल ने स्कॉटलैंड की स्टेफनी करनाचन को 5-0 से हराया, जबकि अरुंधति ने आयरलैंड की एवलिन इवी इघारो को 3-2 से मात दी। अंकुशिता ने इंग्लैंड की एला थॉम्पस्टोन को 4-1 से हराकर स्वर्ण पदक जीता।

ओलंपियन और कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 की स्वर्ण पदक विजेता जैस्मिन लैंबोरिया (महिला 57 किग्रा) और मोहम्मद हुसामुद्दीन (पुरुष 60 किग्रा) ने रजत पदक जीते, जबकि आठ अन्य भारतीय मुक्केबाजों ने कांस्य पदक हासिल किए। पुरुष वर्ग में विवेक मीना (65 किग्रा), हितेश (70 किग्रा), अक्षय (80 किग्रा), बोबिन चौहान (90 किग्रा) और चेतन चौधरी (90 किग्रा) ने कांस्य पदक जीते।
महिला वर्ग में तनु (51 किग्रा), दिशा पाटिल (60 किग्रा) और इमरोज खान (75 किग्रा) ने फिनलैंड में कांस्य पदक जीते। इस टूर्नामेंट में विश्व मुक्केबाजी के नियमों के तहत पुरुषों के 10 और महिलाओं के 7 वजन वर्गों में मुकाबले आयोजित किये गये थे।

.....

Next Post

वैनगंगा की सुरम्य वादी में छुपा खजाना

Mon Nov 2 , 2026
बालाघाट:नगर से 3 कि.मी.दूर छोटा ग्राम गायखुरी जिसके निकट वैनगंगा धरा जो अपने गंतव्य की ओर अग्रसर होती है, जिसे गायखुरी घाट के नाम से जाना जाता है, यहाँ रमणीय प्राकृतिक दृश्य सफेद चट्टानें [पत्थर] सौंदर्यी पर्यटकों को आकर्षित करते है। डाॅ.वीरेन्द्र सिंह गहरवार संग्रहाध्यक्ष इतिहास एवं पुरातत्व शोध संस्थान […]

You May Like