बालाघाट:नगर से 3 कि.मी.दूर छोटा ग्राम गायखुरी जिसके निकट वैनगंगा धरा जो अपने गंतव्य की ओर अग्रसर होती है, जिसे गायखुरी घाट के नाम से जाना जाता है, यहाँ रमणीय प्राकृतिक दृश्य सफेद चट्टानें [पत्थर] सौंदर्यी पर्यटकों को आकर्षित करते है। डाॅ.वीरेन्द्र सिंह गहरवार संग्रहाध्यक्ष इतिहास एवं पुरातत्व शोध संस्थान संग्रहालय बालाघाट ने बताया एक समय था सफेद पत्थरों से रंगोली बनाई जाती थी, जिसे इस ग्राम के बच्चों से लेकर बड़े स्त्री-पुरुष नवरात्रा पर्व, दीपावली पर्व में बालाघाट नगर, गाँव-गाँव प्रातः काल से लेकर देर तक घर-घर बेचा करते थे, अपना जीवन यापन करते थे। जिसे हमनें प्रत्यक्ष रूप से देखा है और इतिहास एवं पुरातत्व शोध संस्थान संग्रहालय बालाघाट में पर्यटक सूची में अंकित भी किया गया है।वर्तमान परिदृश्य में विगत वर्षों से गायखुरीघाट की रंगोली को बन्द कर दिया गया। जहाँ बाहर से रंग-बिरंगी रंगोलियाँ बनकर आती है। अगर प्रशासन चाहें तो ग्राम गायखुरी में लघु उद्योग प्रारंभ कर यहाँ बेरोजगारों को रोजगार उपलब्ध करा सकती है।
