जबलपुर : दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों की सेवा बहाली के मामले में न्यायालय के आदेशों का पालन नहीं होने पर हाईकोर्ट ने शासन को अंतिम अवसर दिया है। न्यायमूर्ति दीपक खोट की एकलपीठ ने तीन सप्ताह में अनुपालन रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। ऐसा नहीं होने पर प्रतिवादी को अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना होगा।
याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता नर्मदा प्रसाद चौधरी व अमित चौधरी ने पैरवी की। नरसिंहपुर निवासी दुर्गेश कुमार सोनी व रूपलाल मेहरा की अवमानना याचिका पर 29 अक्टूबर को सुनवाई के दौरान शासन की ओर से अनुपालन रिपोर्ट पेश करने के लिए समय मांगा गया। कोर्ट ने उल्लेख किया कि प्रतिवादी छह फरवरी 2026 को वकालतनामा दाखिल कर चुके हैं, लेकिन अब तक अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की गई। मामले की अगली सुनवाई 23 नवंबर से शुरू होने वाले सप्ताह में होगी।
याचिकाकर्ताओं के अनुसार, दोनों कर्मचारी लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग में 11 वर्ष से अधिक समय तक दैनिक वेतन पर कार्यरत रहे। उन्हें मौखिक आदेश से सेवा से पृथक कर दिया गया था। श्रम न्यायालय, नरसिंहपुर ने वर्ष 2016 में उनके पक्ष में अवार्ड पारित किया। इसके बाद शासन की रिट अपील और पुनर्विचार याचिका भी खारिज हुई। पुनर्विचार याचिका 15 हजार रुपये की जुर्माने के साथ खारिज की गई। याचिकाकर्ताओं के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने भी 21 सितंबर 2026 को विशेष अनुमति याचिका खारिज कर दी। इसके बावजूद आदेश का पालन नहीं होने पर अवमानना याचिका दायर की गई।
