पटना, 30 अक्टूबर (वार्ता) बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शुक्रवार कहा है कि राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं का तीन से चार गुना विस्तार करने की आवश्यकता है, जिससे आम लोगों को आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधाएं उनके नजदीक उपलब्ध हो सकें।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इसके लिए चिकित्सा महाविद्यालयों और अस्पतालों के संचालन में सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) व्यवस्था को बढ़ावा दिया जाएगा और इस प्रक्रिया में बिहार के चिकित्सकों को प्राथमिकता दी जाएगी।
श्री चौधरी ने आज पटना में इंडियन सोसाइटी ऑफ क्रिटिकल केयर मेडिसिन (आईएससीसीएम) की पटना शाखा की ओर से आयोजित सामाजिक सम्मेलन-2026 का उद्घाटन करने के बाद अपने संबोधन में कहा कि राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था में व्यापक बदलाव की तैयारी की जा रही है। सरकार का प्रयास है कि गंभीर मरीजों को बेहतर उपचार के लिए बाहर नहीं जाना पड़े और उन्हें राज्य में ही आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं मिल सकें।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के जिला अस्पतालों में प्रतिमाह करीब 10 हजार ऑपरेशन किए जा रहे हैं। मरीजों को अनावश्यक रूप से पटना रेफर करने की प्रवृत्ति पर रोक लगाने के लिए भी कदम उठाए जा रहे हैं। अब किसी मरीज को रेफर करने वाले चिकित्सक को इसका कारण स्पष्ट करना होगा। उन्होंने बताया कि राज्य में करीब 16 सरकारी चिकित्सा महाविद्यालयों के भवनों का निर्माण कार्य चल रहा है, जबकि 10 से अधिक सरकारी चिकित्सा महाविद्यालय संचालित हैं। स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के साथ बड़े निजी अस्पतालों की स्थापना और सरकारी अस्पतालों की क्षमता बढ़ाने पर भी काम किया जा रहा है।
श्री चौधरी ने कहा कि चिकित्सा सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए सरकार ने सार्वजनिक-निजी भागीदारी की परिकल्पना की है। इसकी तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं और आने वाले दिनों में इस दिशा में आगे की कार्रवाई की जाएगी। निविदा प्रक्रिया में बिहार के चिकित्सकों को प्राथमिकता देने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी, ताकि राज्य के चिकित्सकों की भागीदारी बढ़े और स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य सेवाएं मजबूत हों। उन्होंने कहा कि चिकित्सकों को उनकी विशेषज्ञता के अनुरूप जिम्मेदारी दी जानी चाहिए। यदि कोई चिकित्सक शल्य चिकित्सक है तो उसकी सेवाएं शल्य चिकित्सा के लिए ही ली जानी चाहिए।
