
नई दिल्ली, देश के बैंकिंग सेक्टर में होने जा रहे अब तक के सबसे बड़े विनिवेश को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी राजनीतिक जंग छिड़ गई है.
जहां एक तरफ लोकसभा में नेताप्रतिपक्ष राहुल गांधी ने आईडीबीआई बैंक के कर्मचारियों के नाम एक भावुक और राजनीतिक पत्र लिखकर केंद्र सरकार की नीतियों पर जमकर निशाना साधा है. वहीं दूसरी ओर वित्त मंत्री सीतारमण ने स्पष्ट किया कि वर्तमान मोदी सरकार के कार्यकाल में बैंकिंग नियमों का कड़ाई से पालन हो रहा है और आईडीबीआई बैंक के विनिवेश की पूरी प्रक्रिया बेहद पारदर्शी तरीके से सभी कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को पूरा करके आगे बढ़ाई जा रही है.
राहुल गांधी ने अपने पत्र में साफ तौर पर कहा है कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक देश की संपत्ति हैं जिन्हें इस तरह बेचा नहीं जा सकता. ये बैंक राष्ट्र निर्माण और आम जनता की सेवा के सबसे बड़े साधन हैं. उन्होंने बैंक कर्मचारियों के संघर्ष की सराहना करते हुए याद दिलाया कि सात साल पहले तक जो बैंक भारी घाटे में चल रहा था, उसे कर्मचारियों ने अपनी कड़ी मेहनत के बल पर पिछले वित्त वर्ष में 9,000 करोड़ रुपये से अधिक के शुद्ध मुनाफे की स्थिति में ला खड़ा किया है. उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि इतने बड़े मुनाफे वाले बैंक को कनाडा की एक निजी फर्म फेयरफैक्स के हाथों में सौंपा जा रहा है, जिससे कर्मचारियों और जमाकर्ताओं के हितों को गंभीर खतरा पैदा हो सकता है.
इस बड़े राजनीतिक विवाद के बीच वित्त मंत्रालय के तहत आने वाले निवेश और सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन विभाग ने भी स्थिति स्पष्ट करते हुए एक विस्तृत बयान जारी किया है. मंत्रालय के अनुसार, इस रणनीतिक विनिवेश के लिए तय किए गए मूल आरक्षित मूल्य में कोई बदलाव नहीं किया गया है. सचिवों के कोर ग्रुप द्वारा अपनाई गई प्रतिस्पर्धी बेस्ट-ऑफर प्रक्रिया की बदौलत ही कुल सौदे की कीमत में 3,917 करोड़ रुपये की महत्वपूर्ण बढ़ोतरी दर्ज की गई है.
उल्लेखनीय है कि सरकार ने इस महीने की शुरुआत में आईडीबीआई बैंक में अपनी और जीवन बीमा निगम की कुल 60.72 प्रतिशत हिस्सेदारी को कनाडा की फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स को लगभग 53,000 करोड़ रुपये में बेचने की मंजूरी दी है, जो बैंकिंग जगत में अब तक का सबसे बड़ा प्रत्यक्ष विदेशी निवेश सौदा माना जा रहा है.
