
जबलपूर, सदर कैंट स्थित ऐतिहासिक शिया नाला कब्रिस्तान में सेना द्वारा कथित तौर पर आवागमन रोके जाने, शवों को दफनाने पर प्रतिबंध लगाए जाने और मौखिक आदेश पारित किए जाने के विरोध में औकाफ जामा मस्जिद मदरसा दुनिया, ईद-गाह व गोरिस्तान सदर बाजार जबलपुर के बैनर तले महामहिम राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और जिला कलेक्टर महोदय के नाम ज्ञापन सौंपा गया है। इसी क्रम में जामा मस्जिद सदर से मुस्लिम समुदाय के सैकड़ों लोगों ने हाथों में तख्तियां लेकर और नारेबाजी करते हुए पैदल मार्च निकाला और तीसरे पुल में पहुंचकर अनुभागीय अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर समस्या के शीघ्र समाधान के लिए बातचीत की।
इस संबंध में लोगों ने बताया कि यह लगभग 250 वर्ष पुराना कब्रिस्तान है जो सर्वे क्रमांक 34 रखा क्रमांक 22 और 443 में दर्ज है तथा वक्फ बोर्ड में विधिवत पंजीकृत है। इस कब्रिस्तान में केवल मुस्लिम समाज ही नहीं बल्कि रैक, तमिल और अन्य समाज के लोग भी अपने परिजनों के शवों को पीढ़ियों से दफनाते आ रहे हैं। समिति का मुख्य आरोप है कि सेना के अधिकारियों द्वारा विगत 5 अक्टूबर को मौखिक आदेश जारी कर कब्रिस्तान में आवागमन और दफनाने पर रोक लगा दी गई है जिससे लद्दुख्वा गेट के निर्माण और उपयोग को लेकर भी गंभीर बाधाएं उत्पन्न हो रही हैं। समुदाय ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि इस गंभीर मामले में जल्द उचित कदम नहीं उठाए गए तो लोग सड़कों पर उतरकर आंदोलन करने के लिए विवश होंगे जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
