नई दिल्ली, भारत और यूरोपीय फ्री ट्रेड एसोसिएशन (EFTA) के सदस्य देश लिकटेंस्टीन के बीच आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी को नए आयाम देने की कवायद तेज हो गई है। लिकटेंस्टीन के प्रिंस एलोइस के हालिया भारत दौरे के दौरान दोनों देशों ने व्यापार, प्रौद्योगिकी और कौशल विकास (3 ‘T’ – Trade, Technology and Talent) को आपसी रिश्तों का मुख्य आधार बनाने पर सहमति जताई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आमंत्रण पर हुए इस उच्चस्तरीय दौरे का मुख्य उद्देश्य भारत-EFTA ट्रेड एंड इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट (TEPA) के तहत मिलने वाले अवसरों को ठोस व्यावसायिक परिणामों में बदलना है, जिससे दोनों देशों के बीच निवेश और तकनीकी सहयोग को बढ़ावा मिल सके।
वडोदरा में हिल्टी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट से लेकर कृषि और अंतरिक्ष तकनीक तक, कई क्षेत्रों में बढ़ रहा है आपसी सहयोग
दोनों देशों के बीच हुए इस सहयोगात्मक संवाद में केवल पारंपरिक व्यापार ही नहीं, बल्कि कृषि तकनीक, एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग और अंतरिक्ष अनुसंधान जैसे आधुनिक क्षेत्र भी शामिल हैं। गुजरात के वडोदरा में हिल्टी कॉर्पोरेशन की नई निर्यात-उन्मुख मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी इसका एक ठोस उदाहरण है, जहां उत्पादित सामानों का बड़ा हिस्सा अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भेजा जाएगा। इसके अलावा, सवाना सीड्स के माध्यम से उन्नत कृषि तकनीक, LGT ग्रुप द्वारा वित्तीय सेवाओं के विस्तार और सैटेलाइट कम्युनिकेशन व स्पेस टेक्नोलॉजी में प्राइवेट सेक्टर की हिस्सेदारी बढ़ाने पर भी विस्तार से चर्चा की गई है, जो दोनों अर्थव्यवस्थाओं के लिए बेहद फायदेमंद साबित होगी।
डबल टैक्सेशन एग्रीमेंट और वोकेशनल एजुकेशन के प्रस्तावों से निवेश को मिलेगा बढ़ावा, दीर्घकालिक साझेदारी की रखी गई मजबूत नींव
द्विपक्षीय संबंधों को और अधिक सुगम बनाने के लिए दोनों पक्षों ने डबल टैक्सेशन अवॉइडेंस एग्रीमेंट (DTAA) के प्रस्ताव पर भी विचार किया है, जिससे निवेशकों को अधिक कानूनी निश्चितता मिल सकेगी। इसके साथ ही, कार्यबल की दक्षता बढ़ाने के लिए वोकेशनल एजुकेशन और ‘LieLa’ भाषा प्रशिक्षण मॉडल जैसे पहलों पर भी मंथन जारी है। विदेश मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार, TEPA फ्रेमवर्क के तहत आने वाले समय में निवेश के नए अवसर पैदा होंगे और भारत-यूरोप आर्थिक जुड़ाव को एक नई गति मिलेगी, जिससे दोनों देशों के नागरिकों के लिए विकास और रोजगार के नए रास्ते खुलेंगे।

