
सीधी । शहर के डैनिहा-चकदही मार्ग स्थित गंगोत्री रिसॉर्ट में इस वर्ष करवाचौथ के पावन अवसर पर एक बेहद सराहनीय और अनोखी पहल देखने को मिली। यहां शहर की महिलाओं ने घरों में अकेले पूजा करने की बजाय एक भव्य सामूहिक पूजन कार्यक्रम का आयोजन किया। भगवान भोलेनाथ की शरण में अखंड सौभाग्य का सामूहिक अनुष्ठान कर सुहागिनों ने एक साथ कथा सुनी और अपने पतियों की दीर्घायु की कामना की। इस आयोजन ने न केवल धार्मिक आस्था को मजबूत किया बल्कि आपसी सामाजिक मेलजोल की भी एक सुंदर मिसाल पेश की।
यहां बताते चलें कि आधुनिकता के दौर में जहां त्यौहारों का दायरा सिमटता जा रहा है वहीं सीधी शहर में परंपरा और सामाजिक एकजुटता की एक बेहद खूबसूरत तस्वीर सामने आई है। शहर के गंगोत्री रिसॉर्ट में इस बार महिलाओं ने सामूहिक करवा चौथ पूजन की एक अनूठी और सराहनीय पहल की। अमूमन घरों की चारदीवारी में अकेले होने वाले इस अनुष्ठान को जब दर्जनों सुहागिनों ने एक साथ मिलकर बड़े स्तर पर मनाया तो पूरा परिसर उत्सव के रंग और भक्तिमय माहौल में सराबोर हो उठा।
गीत-संगीत और सांस्कृतिक गतिविधियों से सजा उत्सव
पूजन के साथ-साथ महिलाओं के मनोरंजन और इस दिन को यादगार बनाने के लिए रिसॉर्ट में पारंपरिक लोक गीतों और संगीत की भी गूंज रही। महिलाओं ने एक-दूसरे को बधाई दी, तस्वीरें खिंचवाई और चांद के दीदार के बाद अघ्र्य देकर अपने पतियों की दीर्घायु का संकल्प लेते हुए व्रत का पारण किया। शहर में इस अनूठे व सामूहिक प्रयास की हर तरफ सराहना हो रही है।
सुहागिनों ने छलनी से किया चांद और पति का दीदार
रात को जैसे ही आसमान में चंद्रमा के दर्शन हुए, महिलाओं का इंतजार खत्म हो गया। सोलह श्रृंगार किए हुए महिलाओं ने छतों और बालकनियों से चंद्र देव को अघ्र्य दिया। इसके बाद पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार छलनी में दीपक रखकर पहले आसमान के चांद को देखा और फिर उसी छलनी से अपने पति का दीदार किया। पति ने अपनी जीवनसंगिनी को पानी पिलाकर उनका व्रत खुलवाया।
इनका कहना है
आजकल की व्यस्त जिंदगी में इस तरह के सामूहिक आयोजन आपसी मेलजोल और भाईचारे को बढ़ावा देते हैं। एक ही छत के नीचे शहर की इतनी सारी महिलाओं का जुटना और एक साथ पूजन करना अपने आप में सीधी शहर के लिए एक नया और सकारात्मक अनुभव है।
श्रीमती मधु सतीश गुप्ता
करवा चौथ का व्रत भारतीय महिलाओं के लिए केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि प्रेम, समर्पण और विश्वास का प्रतीक है। यह व्रत पति-पत्नी के आपसी रिश्ते को और मजबूत बनाता है। यह उनके बीच के प्रेम और समर्पण को दर्शाने का एक विशेष अवसर है।
श्रीमती आरती बृजेश द्विवेदी
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