
नई दिल्ली, आगामी 1 नवंबर को दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में होने वाली विपक्षी दलों की महारैली को लेकर इंडिया गठबंधन के घटक दलों और कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के बीच आज एक उच्च स्तरीय रणनीतिक बैठक संपन्न हुई. इस महत्वपूर्ण बैठक में प्रियंका गांधी वाड्रा और कांग्रेस के संगठन महासचिव के.सी. वेणुगोपाल के अलावा इंडिया गठबंधन में शामिल दलों के नेताओं ने हिस्सा लिया. सूत्रों की मानें तो इस बैठक में आगामी आंदोलन की पूरी रणनीति को अंतिम रूप दिया गया. बैठक में मुख्य रूप से चुनाव आयोग के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी एसआईआर डेटा में कथित विसंगतियों और वोटिंग डेटा में हेरफेर के आरोपों को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की गई. विपक्षी नेताओं ने एक सुर में कहा कि लोकतंत्र और चुनावी प्रक्रिया को कमजोर करने की कोशिशों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. रणनीति के तहत 1 नवंबर की वोट बचाओ, देश बचाओ महारैली में 10 लाख से अधिक लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने का बड़ा लक्ष्य रखा गया है. बैठक में दीवाली के त्योहारी सीजन के कारण स्थानीय व्यापारियों द्वारा रैली को कुछ दिनों के लिए टालने के अनुरोध पर भी चर्चा हुई.
लेकिन विपक्षी नेताओं ने आम सहमति से यह स्पष्ट किया कि चूंकि यह मामला देश के लोकतंत्र और चुनावी पारदर्शिता से जुड़ा है, इसलिए यह आंदोलन अपने पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 1 नवंबर को ही आयोजित होगा. इस बैठक में 30 अक्टूबर को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के दिल्ली आवास पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ एक सार्वजनिक महाभियोग व मॉक पार्लियामेंट कार्यक्रम को लेकर भी स्पष्ट रूपरेखा तैयार की गई. बैठक के तुरंत बाद वरिष्ठ नेताओं ने रामलीला मैदान पहुंचकर जमीनी तैयारियों और सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की.
