बमोरी: मध्य प्रदेश सरकार द्वारा गौ-वंश संरक्षण के लिए प्रति गाय मानदेय 20 रुपये से बढ़ाकर 40 रुपये किया गया है। इसके बावजूद बमोरी क्षेत्र में गौ-वंश के संरक्षण को लेकर जमीनी स्तर पर कई चुनौतियां सामने आ रही हैं। क्षेत्र में शासकीय और अशासकीय मिलाकर एक दर्जन से अधिक गौशालाएं संचालित होने के बावजूद कई स्थानों पर गायें सड़कों पर घूमती दिखाई दे रही हैं, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है।
बमोरी जनपद क्षेत्र में उपलब्ध आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार जून माह तक 12 गौशालाओं में कुल 1266 गाय दर्ज हैं। हालांकि, कुछ स्थानों पर गौशालाओं की गतिविधियां सीमित नजर आईं, जबकि कई जगह गायें खुले में देखी गईं। इससे आंकड़ों और जमीनी स्थिति के बीच अंतर को लेकर चर्चा हो रही है।पड़ताल के दौरान कुछ ग्राम पंचायतों में संचालित गौशालाओं की स्थिति भी सामने आई।
ग्राम पंचायत पाटी में संचालित गौशाला में अभिलेखों में गायों की संख्या दर्ज है, लेकिन मौके पर पशुओं की उपस्थिति नहीं दिखी। इसी तरह बरबन पंचायत की गौशाला में दर्ज संख्या की तुलना में कम गायें पाई गईं। इन स्थितियों को लेकर स्थानीय स्तर पर व्यवस्थाओं की समीक्षा की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
वहीं दूसरी ओर, क्षेत्र में कुछ सकारात्मक प्रयास भी देखने को मिले हैं। फतेहगढ़ क्षेत्र में स्थानीय युवाओं और ग्रामीणों द्वारा बिना किसी सरकारी अनुदान के 200 से अधिक गायों का संरक्षण किया जा रहा है। इसके अलावा मंगरोड़ा और बनेह जैसी कुछ गौशालाएं, जो समिति या एनजीओ के माध्यम से संचालित हैं, अपेक्षाकृत बेहतर ढंग से कार्य करती पाई गईं।
बमोरी क्षेत्र में गौशालाओं की स्थिति (संक्षेप में):
कुल पंचायतें : 80
कुल गौशालाएं : 12
कुल दर्ज गाय (जून तक) : 1266
प्रति गाय सरकारी मानदेय : 40 रुपये
संचालन व्यवस्था : 9 शासकीय, 3 समिति/एनजीओ
इस संबंध में जिला पंचायत गुना के सीईओ अभिषेक दुबे का कहना है कि जिन स्थानों का निरीक्षण किया गया है, उनकी जानकारी उपलब्ध कराई जाए। तथ्यों के आधार पर जांच कर आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
