नई दिल्ली | बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के परिणामों को चुनौती देने वाली प्रशांत किशोर की ‘जन सुराज’ पार्टी को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने पूरे चुनाव को रद्द करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करने से साफ इनकार कर दिया। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को फटकार लगाते हुए कहा कि केवल इसलिए कि आपकी पार्टी चुनाव हार गई है, आप पूरे चुनावी परिणाम को शून्य घोषित करने की मांग नहीं कर सकते। जस्टिस सूर्यकांत ने टिप्पणी की कि ऐसी ‘सर्वग्राही’ (Omnibus) याचिकाएं स्वीकार नहीं की जा सकतीं और याचिकाकर्ता को इसके लिए पटना हाई कोर्ट का रुख करना चाहिए।
जन सुराज पार्टी ने अपनी याचिका में आरोप लगाया था कि चुनाव आचार संहिता लागू होने के दौरान बिहार सरकार ने ‘मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना’ के तहत करीब 25 से 35 लाख महिलाओं के खातों में 10-10 हजार रुपये ट्रांसफर किए। याचिका में इसे मतदाताओं को लुभाने के लिए “भ्रष्ट आचरण” बताया गया था। हालांकि, सुनवाई के दौरान सीजेआई ने इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि यह राशि महिलाओं की सहायता के लिए एक कल्याणकारी योजना के तहत दी गई थी। कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर किसी विशिष्ट सीट पर धांधली का आरोप है, तो उसके लिए चुनाव याचिका (Election Petition) दायर करने की एक तय कानूनी प्रक्रिया होती है।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अनुच्छेद 32 के तहत इस प्रकार की रिट याचिका के जरिए पूरे राज्य का चुनाव रद्द करना संवैधानिक रूप से उचित नहीं है। पीठ ने प्रशांत किशोर की पार्टी को सलाह दी कि यदि उन्हें कोई शिकायत है, तो वे उचित कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए पटना हाई कोर्ट में अपनी बात रखें। गौरतलब है कि 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए ने 202 सीटों के साथ प्रचंड बहुमत हासिल किया है, जबकि जन सुराज पार्टी अपना खाता खोलने में भी विफल रही। जेडीयू और बीजेपी ने इस याचिका को ‘जनता के जनादेश का अपमान’ करार दिया है।

