मुंबई | भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) ने वित्त वर्ष की अंतिम समीक्षा बैठक में रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रखने का बड़ा फैसला लिया है। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने शुक्रवार को घोषणा की कि वैश्विक परिस्थितियों और घरेलू महंगाई को देखते हुए नीतिगत दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इस निर्णय का सीधा मतलब यह है कि फिलहाल होम लोन, कार लोन या पर्सनल लोन की ईएमआई (EMI) में आम जनता को कोई राहत नहीं मिलेगी। हालांकि, बैंक ने अपना रुख ‘तटस्थ’ (Neutral) बनाए रखा है, जिससे भविष्य में जरूरत पड़ने पर दरों में कटौती के द्वार खुले रहेंगे।
गवर्नर मल्होत्रा ने बताया कि भारतीय अर्थव्यवस्था लचीली बनी हुई है और चालू वित्त वर्ष के लिए जीडीपी ग्रोथ अनुमान को बढ़ाकर 7.4 प्रतिशत कर दिया गया है। महंगाई के मोर्चे पर आरबीआई ने सतर्कता बरतते हुए वित्त वर्ष 2026 के लिए खुदरा महंगाई दर का अनुमान 2.1% बताया है। रिपोर्ट के अनुसार, एसडीएफ (SDF) दर 5% और एमएसएफ (MSF) दर 5.50% पर बनी रहेगी। गवर्नर ने यह भी साझा किया कि अगले दो दिनों में देश को जीडीपी और महंगाई के लिए एक नया ‘बेस ईयर’ मिलने वाला है, जो आर्थिक आंकड़ों की गणना को और अधिक सटीक बनाएगा।
आरबीआई ने भारत-अमेरिका और भारत-यूरोपीय संघ के बीच होने वाले संभावित व्यापार समझौतों को भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए गेम-चेंजर बताया है। गवर्नर ने कहा कि बजट 2026 में घोषित उपाय विकास के अनुकूल हैं और इन अंतरराष्ट्रीय डीलों से भारतीय सेवाओं के निर्यात को जबरदस्त मजबूती मिलेगी। भारत अभी भी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) के लिए दुनिया का सबसे आकर्षक गंतव्य बना हुआ है। केंद्रीय बैंक के अनुसार, मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार और निर्यात में संभावित वृद्धि के चलते देश की वित्तीय स्थिति पूरी तरह सुरक्षित और प्रगतिशील है।

