
नीमच। नीमच पुलिस अधीक्षक राजेश व्यास अपनी त्वरित कार्यप्रणाली और संवेदनशीलता के लिए जाने जाते हैं। गुरुवार को एक बार फिर उनकी सजगता का उदाहरण तब देखने को मिला, जब सोशल मीडिया (व्हाट्सएप ग्रुप) पर उठे एक गंभीर मुद्दे पर उन्होंने पब्लिक डोमेन में ही तत्काल संज्ञान लिया और कुछ ही मिनटों के भीतर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक हेमलता अग्रवाल को मौके पर जाकर जांच करने के निर्देश दे दिए।
क्या था पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार, गुरुवार सुबह नीमच सिटी थाने में उस समय हंगामे की स्थिति बन गई, जब मालखेड़ा से एक महिला को पुलिस पूछताछ के लिए थाने लेकर आई। परिजनों का आरोप था कि पुलिस को किसी मामले में ‘नेहा’ नाम की महिला की तलाश थी, लेकिन पुलिस ने नाम की गफलत में 6 माह की गर्भवती महिला ‘जया’ को पकड़ लिया। परिजनों का कहना था कि आज करवा चौथ का पर्व है और वे जया के आधार कार्ड सहित तमाम मूल दस्तावेज दिखाने को तैयार हैं, लेकिन थाने में मौजूद पुलिसकर्मी (मदन लाल सिंगार) दस्तावेज मानने के बजाय महिला को न्यायालय में पेश करने और वहीं जाकर पहचान साबित करने की बात कह रहे हैं।
व्हाट्सएप पर चला पॉइंट, एसपी ने तुरंत दिया जवाब
यह मामला सुबह करीब 9:54 बजे नीमच पर मामले की गंभीरता को देखते हुए एसपी राजेश व्यास ने तुरंत ग्रुप में ही स्पष्ट किया कि महिला को गिरफ्तार नहीं किया गया है। धारा 307 (हत्या के प्रयास) के एक प्रकरण में ‘नेहा’ नाम की महिला की आवश्यकता थी, जिसके लिए सही महिला की पहचान करवाई जा रही है। उन्होंने आश्वस्त किया कि किसी भी निर्दोष या गलत व्यक्ति को परेशान नहीं किया जाएगा।
10 मिनट के भीतर एएसपी को भेजा थाने
जब ग्रुप में दोबारा यह बात सामने आई कि निचले स्तर पर पुलिसकर्मी परिजनों के दस्तावेज देखने को तैयार नहीं हैं और महिला गर्भवती है, तो एसपी राजेश व्यास ने बिना किसी देरी के सुबह 11:20 बजे व्हाट्सएप ग्रुप पर ही एडिशनल एसपी हेमलता अग्रवाल को टैग करते हुए निर्देश दिए— “आप थाना जाकर स्वयं देख लें, थाना प्रभारी को भी मेरे द्वारा बता दिया गया है।” इसके ठीक 3 मिनट बाद (11:23 बजे) एसपी ने ग्रुप में अपडेट दिया कि “ASP मैडम थाने पहुंच रही हैं।”
सराहनीय रही एसपी की संवेदनशीलता
बिना किसी औपचारिक शिकायत के इंतजार किए, केवल व्हाट्सएप पर आए एक मैसेज पर जिस तत्परता से एसपी राजेश व्यास ने संज्ञान लिया, उसकी ग्रुप में मौजूद शहर के जागरूक नागरिकों और पत्रकारों ने जमकर सराहना की। लोगों का कहना है कि एक संवेदनशील मामले में, जहां एक गर्भवती महिला और उसके परिजन परेशान हो रहे थे, एसपी के इस त्वरित हस्तक्षेप से पुलिस की छवि और आमजन के विश्वास को मजबूती मिली है।
