यरुशलम, 28 अक्टूबर (वार्ता) इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के दक्षिणपंथी गठबंधन और गादी आइजनकोट के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन में से कोई भी संसद में बहुमत के लिए जरूरी 61 सीटें हासिल नहीं कर सका है। इससे कड़े मुकाबले वाले चुनाव के बाद देश में लंबे समय तक राजनीतिक गतिरोध बने रहने की आशंका है।
मतदान के बाद आए एग्जिट पोल में शुरुआत में नेतन्याहू के गठबंधन को 51-52 सीटें और आइजनकोट के गठबंधन को 49-51 सीटें मिलने का अनुमान जताया गया था।
श्री नेतन्याहू की लिकुड पार्टी को 27 सीटें मिलने का अनुमान था, जबकि श्री आइजनकोट की याशर पार्टी को 21 सीटें मिलने की संभावना जताई गई थी। अरब नेतृत्व वाले दलों को शुरुआत में 18-19 सीटें मिलने का अनुमान था, जो चुनाव में एक अभूतपूर्व नतीजा हो सकता था।
मतगणना आगे बढ़ने के साथ इजरायल के केंद्रीय निर्वाचन आयोग की ओर से जारी आंशिक नतीजों में अलग तस्वीर सामने आई। बुधवार को स्थानीय समयानुसार दोपहर 12.34 बजे तक 84.5 प्रतिशत मतपेटियों की गिनती पूरी होने के बाद श्री नेतन्याहू के गठबंधन को 54 सीटें, जबकि श्री आइजनकोट के गठबंधन को 49 सीटें मिली थीं। अरब नेतृत्व वाले ज्वाइंट लिस्ट और राम दलों को संयुक्त रूप से 17 सीटें मिलीं।
तीन दल अब भी 3.25 प्रतिशत की चुनावी सीमा से नीचे थे। इनमें रिजर्विस्ट्स को 2.7 प्रतिशत, पीपुल ऑफ इजरायल को 1.6 प्रतिशत और चरेदी पब्लिक को 0.2 प्रतिशत वोट मिले थे। ये आंकड़े अस्थायी थे, क्योंकि सैनिकों सहित अन्य मतदाताओं के डबल-लिफाफे वाले मतों की गिनती अभी बाकी थी।
इस नतीजे के कारण श्री नेतन्याहू कार्यवाहक प्रधानमंत्री बने रह सकते हैं, जबकि विपक्ष कनेसेट में अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश करेगा। राजनीतिक गतिरोध के कारण एक और चुनाव की नौबत आ सकती है, जो अप्रैल में भी कराया जा सकता है।
सैद्धांतिक रूप से श्री आइजनकोट का गठबंधन अरब नेतृत्व वाले दलों के समर्थन से अल्पमत सरकार बनाने की कोशिश कर सकता है, हालांकि इसकी संभावना कम दिखाई दे रही है। श्री नेतन्याहू और श्री आइजनकोट के बीच राष्ट्रीय एकता सरकार बनने की संभावना भी कम है, क्योंकि विपक्षी दल मौजूदा प्रधानमंत्री के नेतृत्व वाली सरकार में शामिल होने के इच्छुक नहीं हैं।श्री आइजनकोट ने आधी रात के तुरंत बाद एक भाषण में जीत का दावा किया। उन्होंने कहा कि यदि श्री नेतन्याहू एक ‘ईमानदार नेता’ होते, तो बदलाव के पक्ष में जनता के मतदान के बाद उन्हें राजनीति छोड़ देनी चाहिए। उन्होंने नई सरकार के गठन से पहले श्री नेतन्याहू को राजनीतिक लाभ के लिए सैन्य कार्रवाई शुरू करने के प्रति आगाह भी किया।
श्री आइजनकोट ने कहा, “श्री नेतन्याहू, इजरायल की सुरक्षा का इस्तेमाल अपनी राजनीतिक जरूरतों के लिए करने की हिम्मत मत करना।” उन्होंने इजरायल रक्षा बलों के कमांडरों और सुरक्षा एवं खुफिया एजेंसियों के प्रमुखों से याद रखने को कहा कि श्री नेतन्याहू कार्यवाहक सरकार का नेतृत्व कर रहे होंगे।
श्री आइजनकोट ने अपनी प्रस्तावित सरकार के तीन सिद्धांत बताए। इनमें इजरायल को यहूदी और लोकतांत्रिक राष्ट्र बनाए रखना, सभी नागरिकों के लिए सैन्य और राष्ट्रीय सेवा अनिवार्य करना तथा हमास को खत्म करना शामिल है।
श्री नेतन्याहू ने भी रात तीन बजे के बाद समर्थकों को संबोधित करते हुए जीत का दावा किया, हालांकि उन्होंने स्वीकार किया कि आधिकारिक नतीजे अभी आने बाकी हैं।
उन्होंने कहा, “लिकुड इजरायल की सबसे बड़ी पार्टी है।” उन्होंने दावा किया कि दक्षिणपंथी गठबंधन को “जायोनी जनता और समूची यहूदी आबादी के बीच स्पष्ट और निर्णायक बहुमत” हासिल है।
श्री नेतन्याहू ने ‘एक मजबूत यहूदी दक्षिणपंथी राष्ट्रीय सरकार’ बनाने का आह्वान किया और उन दलों के समर्थन पर निर्भर रहने से इनकार किया, जिन्हें उन्होंने ‘जायोनीवाद-विरोधी अरब दल’ बताया। उनका इशारा उन दलों की ओर था, जिनका समर्थन श्री आइजनकोट को संसद में बहुमत हासिल करने में मदद कर सकता है।
श्री नेतन्याहू ने यह भी दावा किया कि ईरान पहले से कहीं कमजोर और इजरायल पहले से कहीं अधिक मजबूत है। उन्होंने कहा कि जब तक ईरानी शासन सत्ता में रहेगा, तेहरान इजरायल को नष्ट करने की कोशिश करता रहेगा।
उन्होंने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ मिलकर इजरायल के पास ‘इस खतरे को हमेशा के लिए खत्म करने’ की ताकत है। चुनाव प्रचार के दौरान दोनों पक्षों ने चेतावनी दी थी कि उनके विरोधियों की जीत के विनाशकारी परिणाम हो सकते हैं। शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, गहरे राजनीतिक विभाजन के बीच मतदान करने पहुंचे इजरायलियों की भागीदारी पिछले तीन दशकों में सबसे अधिक रही।
मतगणना बुधवार को भी जारी है। अंतिम सीटों का बंटवारा शेष मतों की गिनती और चुनावी सीमा से नीचे चल रहे दलों के उसे पार कर पाने पर निर्भर करेगा।
