
रीवा, रीवा के गांधी मेमोरियल अस्पताल में प्रसव के दौरान हुई प्रसूता कल्पना मिश्रा और उनके नवजात शिशु की मौत के मामले में न्याय की आस में पीडि़त पिता राम शिरोमणि मिश्रा एक बार फिर कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंचे. एक महीने से भी अधिक का समय बीत जाने के बाद भी मजिस्ट्रीयल जाँच रिपोर्ट न मिलने से नाराज और व्यथित पिता ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं.
कलेक्ट्रेट के चक्कर काट-काटकर थक चुके बेबस पिता ने प्रशासनिक संवेदनहीनता से तंग आकर यहाँ तक कह दिया कि ‘इस तरह प्रताडि़त करने की बजाय प्रशासन उन्हें भी जान से खत्म कर दे. ‘बेटी और नाती को खोने के बाद न्याय की मांग को लेकर पीडि़त पिता राम शिरोमणि मिश्रा ने रीवा के सिरमौर चौराहे पर अन्न-जल त्यागकर अनिश्चितकालीन आमरण अनशन शुरू कर दिया था. करीब 15 दिनों तक खुले आसमान के नीचे चले इस कड़े संघर्ष के दौरान उनकी तबीयत बेहद बिगड़ गई थी, जिसके बाद पुलिस व प्रशासन ने आधी रात को भारी बल प्रयोग कर धरना खत्म कराया और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया था. इस बढ़ते जनाक्रोश को देखते हुए रीवा कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी ने मामले की मजिस्ट्रीयल जाँच के निर्देश दिए थे, जिसकी जिम्मेदारी सिरमौर एसडीएम दृष्टि जायसवाल को सौंपी गई थी. जाँच के लिए 30 दिन की समय-सीमा तय की गई थी.
कलेक्ट्रेट का चक्कर काट रहे पर रिपोर्ट नही मिली: राम शिरोमणि
प्रशासन द्वारा जाँच रिपोर्ट सौंपने के लिए एक महीने का समय तय किया गया था, जो अब पूरी तरह बीत चुका है. पीडि़त पिता राम शिरोमणि मिश्रा का आरोप है कि वह लगातार कलेक्ट्रेट के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन अधिकारी उन्हें जाँच रिपोर्ट की प्रति सौंपने में टालमटोल कर रहे हैं. कलेक्ट्रेट परिसर में मीडिया और अधिकारियों के सामने अपनी व्यथा सुनाते हुए पिता ने कहा कि न्याय देने के नाम पर प्रशासन उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताडि़त कर रहा है. बेटी के जाने के गम में डूबे पिता ने रुंधे गले से कहा कि अगर प्रशासन दोषियों को बचाना चाहता है और उन्हें न्याय नहीं दे सकता, तो उन्हें इस तरह तड़पाने के बजाय उनकी भी जिंदगी खत्म कर दे.
