बालाघाट:शहर के ऐतिहासिक शासकीय देवी तालाब के संरक्षण को लेकर एनजीटी भोपाल में हुई सुनवाई में सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों, वेटलैंड की पहचान, तालाब के सीमांकन, अतिक्रमण संबंधी विवाद और प्रदूषित पानी की रोकथाम जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे सामने आए हैं। एनजीटी भोपाल ने निष्पादन आवेदन क्रमांक 13/2026, मूल प्रकरण क्रमांक 130/2025 में 8 अक्टूबर 2026 को आदेश पारित किया। इस आदेश में अधिकारियों की ओर से प्रस्तुत अनुपालन रिपोर्ट, तालाब के संरक्षण के लिए किए गए कार्यों और सीवेज परियोजना की प्रगति का विवरण दर्ज किया गया है। देवी तालाब का मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसके संरक्षण की कार्यवाही सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन और एनजीटी के 27 अप्रैल 2026 के आदेश से जुड़ी हुई है।
सर्वोच्च न्यायालय की रिट याचिका 304/2018 के निर्देशों का उल्लेख
एनजीटी के आदेश में सर्वोच्च न्यायालय की रिट याचिका क्रमांक 304/2018 का उल्लेख करते हुए जल निकायों की पहचान और संरक्षण संबंधी निर्देशों के अनुपालन की जानकारी दर्ज की गई है। आदेश के अनुसार, 2.25 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल वाले जल निकायों की सूची को EPCO पोर्टल पर अद्यतन करने की जिम्मेदारी कलेक्टर, बालाघाट को सुनिश्चित करनी थी। इसके अनुपालन में संबंधित मुख्य नगरपालिका अधिकारी और तहसीलदार द्वारा अभिलेखों को अद्यतन किए जाने की जानकारी प्रस्तुत की गई। कलेक्टर बालाघाट की ओर से बताया गया कि लगभग 988 वेटलैंड की पहचान की गई है। इनमें से 986 का सीमांकन कर संबंधित विवरण ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड किया जा चुका है। शेष दो वेटलैंड वन क्षेत्रों में स्थित होने के कारण उनके सीमांकन की जिम्मेदारी संबंधित वन अधिकारियों की बताई गई। इस प्रकार देवी तालाब का संरक्षण, जल निकायों की पहचान, सीमांकन और पर्यावरणीय सुरक्षा से जुड़ी व्यापक प्रक्रिया कर ली गई
देवी तालाब समेत जिले में 988 जलस्त्रोत संरक्षित
सर्वोच्च न्यायालय की रिट याचिका क्रमांक 304/2018 के पालन में कलेक्टर बालाघाट की अध्यक्षता में दिनांक 05.10.2026 को हुई बैठक में देवी तालाब के साथ जिले के 988 जलस्त्रोतो को वेटलैंड के रूप में दर्ज कर लिया है जिसके बाद देवी तालाब समेत बालाघाट जिले के 988 जलस्त्रोतों को भरा या नष्ट नहीं किया जा सकता है। ऐसे में बालाघाट जिले की तहसील कटंगी में 98, किरनापुर में 65, खैरलांजी में 105, तिरोडी में 117, परसवाडा में 53, बालाघाट में 49, बिरसा में 62, बैहर में 55, लांजी में 72, लामता में 42, लालबर्रा में 119 और वारासिवनी में 151 कुल 988 जलस्त्रोतों को सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के अनुसार कलेक्टर बालाघाट ने संरक्षित घोषित कर दिया है जिसके बाद इन जलस्त्रोतों में मिट्टी भरना, निर्माण करना, प्रदूषित जल छोड़ना और किसी प्रकार का अतिक्रमण प्रतिबंधित कर दिया है और यदि ऐसा होता है तो कलेक्टर बालाघाट के द्वारा प्रभावी कार्यवाही की जायेगी।
निवेशकों के पैसे गये पानी में
जानकारी के अनुसार बालाघाट नगर में स्थित देवी तालाब को पूर्व मालगुजार के वरसानों बालाघाट के बिल्डर ऋषभ डेवलपर्स को अवैध रूप से बेच दिया था, जिसके बाद ऋषभ डेवलपर्स में भागीदार महेंद्र सुराना, पुरनकुमार अडवाणी और डॉ. आर.के.जैन ने देवी तालाब के कुछ हिस्से को भरने का प्रयास किया और पानी से भरे तालाब में प्लाटिंग कर कई लोगों को बेच दिया। सर्वोच्च न्यायालय और एनजीटी भोपाल के आदेश के बाद बालाघाट नगर का देवी तालाब अब संरक्षित हो गया है जहाँ तालाब को भरने या नष्ट करने का काम नहीं किया जा सकता। ऐसे में उन निवशकों के मन में कई सवाल उठने लगे है कि क्या उनके निवेश किये गए पैसे देवी तालाब के पानी में ही डूब गए
क्या करना होगा निवेशकों को
सर्वोच्च न्यायालय और एनजीटी भोपाल के आदेश और कलेक्टर बालाघाट के द्वारा देवी तालाब को वेटलैंड के रूप में संरक्षित घोषित करने के बाद यह तो स्पष्ट हो गया है कि देवी तालाब को किसी भी परिस्तिथि में भरा या नष्ट नहीं किया जा सकता और यदि किसी के द्वारा ऐसा किया जा जाता है तो कलेक्टर बालाघाट उसके विरुद्ध वैधानिक कार्यवाही करने के लिए बाध्य है। ऐसी स्थिति में निवेशकों को कालोनाईजर से रजिस्ट्री के समय दिए गए पैसों की मांग करनी चाहिए और कालोनाईजर उनके पैसे नहीं लौटाता है तो कालोनाईजर के विरुद्ध क़ानूनी कार्यवाही करना चाहिए।
फुल टैंक लेवल से 33 मीटर के दायरे में बने निर्माणों की जांच
देवी तालाब के फुल टैंक लेवल (FTL) से 33 मीटर के दायरे में मौजूद संरचनाओं की स्थिति का पता लगाने के लिए एसडीएम बालाघाट गोपाल सोनी ने 5 अक्टूबर 2026 को मुख्य नगरपालिका अधिकारी, नगरपालिका बालाघाट एवं तहसीलदार बालाघाट को निर्देश जारी किए है। जिसमें एसडीएम बालाघाट ने मुख्य नगरपालिका अधिकारी, नगरपालिका बालाघाट एवं तहसीलदार बालाघाट को संबंधित संरचनाओं की जांच कर जियो-टैग्ड तस्वीरों सहित विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने को कहा गया है
देवी तालाब का संरक्षण बालाघाट की ऐतिहासिक धरोहर का सवाल
देवी तालाब का संरक्षण केवल सफाई और सौंदर्यीकरण तक सीमित विषय नहीं है। यह शहर के जलस्रोत, पर्यावरण और ऐतिहासिक धरोहर की सुरक्षा से जुड़ा है। सर्वोच्च न्यायालय की रिट याचिका 304/2018 के निर्देशों का संदर्भ और एनजीटी की कार्यवाही इस विषय के महत्व को रेखांकित करते हैं। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नगरपालिका निर्धारित समय-सीमा में सीवेज परियोजना पूरी करती है या नहीं और तालाब को प्रदूषण से बचाने के लिए आवश्यक कदम कितनी प्रभावी तरह से लागू किए जाते हैं।
