अस्तित्व खो रही जीवनदायिनी: माई नदी को मिटाने की साजिश

कटनी: शहर की प्यास बुझाने वाली माई नदी पर इन दिनों भू-माफिया का ‘मशीनी प्रहार’ जारी है। रबर फैक्ट्री के पीछे और तुलसी नगर के बीच के हिस्से को जिस तरह मिट्टी से पाटा जा रहा है, उसने शहर के भविष्य पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।पिछले दो दिनों से इलाके में भारी मशीनें (JCB/पोकलेन) गरज रही हैं। स्थानीय निवासियों के अनुसार, नदी की धारा को मिट्टी से दबाया जा रहा है और किनारे लगे हरे-भरे पेड़ों को जमींदोज किया जा रहा है। यह सब कुछ किसी विकास कार्य के लिए नहीं, बल्कि नदी की बेशकीमती जमीन पर अवैध कब्जा करने की नीयत से किया जा रहा है।
कल संवारा, आज उजाड़ रहे:
हैरानी की बात यह है कि मात्र दो साल पहले ही नगर निगम ने इसी स्थान पर लाखों रुपये खर्च कर नदी का गहरीकरण कराया था। तब का लक्ष्य जलस्तर बढ़ाना और जल संकट दूर करना था।
अब आज उसी गहरीकरण वाली जगह को मिट्टी डालकर समतल किया जा रहा है।संजीव कुमार स्थानीय नागरिक ने कहा जब प्रशासन ने खुद पैसा खर्च कर इसे गहरा किया था, तो अब इसे खत्म होते देख जिम्मेदार मौन क्यों हैं।
खतरे में शहर: बाढ़ और सूखे की दोहरी मार
विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि माई नदी का प्राकृतिक प्रवाह बाधित हुआ, तो इसके परिणाम भयावह होंगे:जलभराव: तुलसी नगर और साईंपुरम जैसे इलाके पहले ही बारिश में डूब जाते हैं। नदी पाटने से बाढ़ का खतरा कई गुना बढ़ जाएगा।जल संकट: भू-जल स्तर (Groundwater level) तेजी से गिरेगा, जिससे आने वाली गर्मियों में शहर बूंद-बूंद को तरसेगा।

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