खंडवा: जिले की सबसे बड़ी और बहुचर्चित जावर-सिहाड़ा उद्वहन सिंचाई योजना अब भ्रष्टाचार और लापरवाही का सबसे बड़ा उदाहरण बनती जा रही है। करोड़ों रुपये की लागत से बनी इस योजना की हकीकत यह है कि पानी खेत तक पहुंचने से पहले ही पाइपलाइन दम तोड़ रही है।
सांसद ने कल ही दिए थे जांच के आदेश, आज फिर फूटी पाइप
सबसे बड़ी बात यह है कि सोमवार, 27 अक्टूबर को जिला जल उपयोगिता समिति की बैठक कलेक्टर सभाकक्ष में हुई थी। इस बैठक में सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल ने खुद झिरनिया और खंडवा सिंचाई परियोजना के साथ-साथ जावर-सिहाड़ा योजना की जांच के निर्देश दिए थे। उन्होंने अधिकारियों को फटकार भी लगाई थी कि किसानों को समय पर पानी दो।
लेकिन जांच के आदेश का स्याही सूखने से पहले ही, आज फिर योजना की मेन पाइपलाइन फूट गई। आपके द्वारा भेजे गए वीडियो में साफ दिख रहा है कि किस तरह प्रेशर के साथ पानी खेतों में तबाही मचा रहा है। यह पहली बार नहीं है, कुछ दिन पहले भी इसी लाइन में बड़ा लीकेज हुआ था।
गेहूं-चना बोनी पर सीधा संकट
इस समय रबी सीजन की सबसे अहम बोनी चल रही है। जावर, सिहाड़ा, छैगांवमाखन, पुनासा बेल्ट के हजारों किसान इसी योजना के भरोसे बैठे हैं। अगर समय पर पानी नहीं मिला तो गेहूं और चने की बोनी 15 दिन लेट हो जाएगी, जिससे उत्पादन आधा रह जाएगा। किसानों का कहना है कि विभाग सिर्फ बैठकें कर रहा है, जमीन पर काम जीरो है।
क्यों फूट रही है बार-बार पाइपलाइन? किसानों और तकनीकी जानकारों का सीधा आरोप है –
1. घटिया क्वालिटी के पाइप-योजना में तय मापदंड से हल्के और कम प्रेशर क्षमता वाले पाइप लगाए गए हैं।
2. जॉइंट में खेल- पाइपों के जॉइंट सही से वेल्ड नहीं किए गए, इसीलिए प्रेशर आते ही जॉइंट खुल जा रहे हैं।
3. ठेकेदार-अधिकारी गठजोड़: करोड़ों के बिल पास कराने के लिए गुणवत्ता से समझौता किया गया।
किसानों की 4 बड़ी मांग
1. पूरी योजना की थर्ड पार्टी तकनीकी जांच हो, पाइप किस कंपनी के हैं, उसकी लैब टेस्ट हो।
2. अब तक हुए भुगतान और वर्क ऑर्डर की जांच हो।
3. बार-बार पाइप फूटने से जिन किसानों की फसल और जमीन खराब हुई, उन्हें मुआवजा मिले।
4. जिम्मेदार ठेकेदार और तत्कालीन अधिकारियों पर एफआईआर दर्ज हो।
अगर जल्द समाधान नहीं हुआ तो किसान बड़ा आंदोलन करेंगे।
