महाकौशल की डायरी
अविनाश दीक्षित
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानि एसआईआर के काम में इन दिनों बीएलओ और मतदाता दोनों ही अपने-अपने माथे पकड़ने मजबूर हो रहे हैं। जबलपुर में कई जगह तो बीएलओ अपने-अपने वरिष्ठ अधिकारियों को कोसते हुए नजर आए, वजह जब उनसे जानी गई तो उन्होंने स्पष्ट कहा कि वरिष्ठ अधिकारियों से मैन्युअल मतदाता सूची मांगी जा रही है लेकिन वह दे नहीं रहे हैं। ऐसे में एप के माध्यम से खोजने पर वार्ड और विधानसभा तो छोड़ो पूरे देश व प्रदेश का नाम आ रहा है। इसमें फिर विधानसभा और फिर वार्ड व बूथ तक मतदाताओं के नाम खोजना पड़ रहे हैं जो कि काफी टेढी खीर साबित हो रहा है।
मतलब साफ है एप से काम करना बीएलओ को बिल्कुल रास नहीं आ रहा है। उधर मतदाता भी ये कहते हुए नजर आ रहे हैं कि वर्ष 2003 की वार्डवार मैन्युअल मतदाता सूची लेकर बीएलओ को उनके पास पहुंचना चाहिए, इससे सबंधित बूथ की लिस्ट में मतदाता के नाम को आसानी से खोजा जा सकता है। गौरतलब है कि प्रशासन का पूरा अमला मैदान पर है और बीएलओ की जिम्मेदारी है कि वर्ष 2003 की मतदाता सूची में संबंधित परिवार के लोगों का नाम है कि नहीं ये जानकारी देने की लेकिन फिलहाल अभी ये काम बीएलओ जनता पर छोड़ते नजर आ रहे हैं। आलम यह है कि जिन गिने चुने राजनीतिक कार्यकर्ताओं के पास 2003 की मतदाता सूची है उन इलाकों में बीएलओ ज्यादा परेशान नहीं दिख रहे किन्तु जहाँ यह उपलब्ध नहीं है वहां जानकारी जुटाना बीएलओ के लिए मुश्किल हो रहा है। उधर एसआईआर के कामकाज देख रहे अफसर हंटर फटकारे जा रहे हैं।
जनता के राडार पर 2 पुलिस कप्तान
महाकौशल के दो सबसे चर्चित शहर जबलपुर और सिवनी इन दिनों अपने पुलिस कप्तानों की लचर कार्यशैली के लिए चर्चाओं में हैं। सिवनी में जहां 2.96 करोड़ के हवाला लूटकांड में पुलिस कर्मियों की सहभागिता का खुलासा हुआ तो वहीं जबलपुर में बीते 3 माह में लूट, चाकूबाजी, दुुष्कर्म और हत्याओं की वारदातों ने कानून व्यवस्था को कटघरे में खड़ा कर दिया है। शहरवासियों के बीच चर्चाएं हैं कि पुलिस का किसी भी अपराधी को कोई भय नहीं है जिसका नतीजा है आए दिन जबलपुर में अपराध बड़ी संख्या में घटित होते जा रहे हैं। चाकूबाजी से हत्याओं से आए दिन सड़के खून से लाल हो रहीं हैं।
ऐसे में लोग अब ये कहने लगे हैं कि हमे ऐसा पुलिस कप्तान नहीं चाहिए जिनके राज में ऐसा जंगलराज बना हुआ है। उधर सिवनी में पुलिस कर्मियों द्वारा घटित किए गए हवाला लूटकांड को लेकर भी कहीं न कहीं एसपी की ढिलाई चर्चाओं का विषय बनी हुई है जिसका नतीजा था कि कांड में डीजीपी ने डीएसपी पूजा पांडे सहित 9 पुलिस कर्मियों को निलंबित किया था और जांच के निर्देश दिए थे। मामले में अभी तक 2 डीएसपी, एक कांस्टेबल, एक टीआई की भागीदारी सामने आई है जिससे साफ है कि हवाला लूटकांड की पूरी स्क्रिप्ट दो डीएसपी, एक टीआई, कांस्टेबल ने लिखी थी।
यात्रा-स्वास्थ्य भत्तों में हो गया करोड़ों का खेल
वैसे तो घोटाला नाम ही ऐसा है जिसकी जांच की जद में नाम आने के बाद अच्छे-अच्छों के पसीने छूट जाते हैं और कुछ यही भय इन दिनों छटवीं बटालियन रांझी के अधिकारी-कर्मचारियों के खेमे में नजर आया.. वजह छटवीं बटालियन रांझी में करीब 4 करोड़ रुपए के भत्ता घोटाले के खुलासे का.. शुरूआती जांच हुई तो 12 कर्मचारियों के बैंक खाते फ्रीज कर दिए गए।
जानकारों का जो पक्ष सामने आ रहा है उससे तो साफ है कि ये घोटाला सिर्फ 4 करोड़ तक सीमित नहीं रहने वाला है ये आंकड़ा अभी और बढ़ने वाला है। खबर है कि छटवीं बटालियन रांझी में यात्रा और स्वास्थ्य भत्तों के नाम पर शासकीय राशि का गबन किया है। जबलपुर में इस घोटाले का खुलासा हुआ तो भोपाल में बैठे पुलिस के आला अधिकारियों के कान खड़े हो गये हैं। देखना दिलचस्प होगा कि इस घोटाले की जद में कौन कौन आते हैं।
