नीतीश के अनुभवी हाथों को पुनः मिली बिहार की कमान

दलीय,क्षेत्रीय व जातीय समीकरण को साधते हुए एमवाई को मिला महत्व

प्रवेश कुमार मिश्र

नई दिल्ली:बिहार विधानसभा चुनाव में अप्रत्याशित विजय के बाद 10वीं बार मुख्यमंत्री बने नीतीश कुमार ने अपने मंत्रिमंडल में न सिर्फ जातीय व क्षेत्रीय समीकरण को साधा है बल्कि दलीय एकजुटता को विशेष महत्व देते हुए बिहार में पांच दलों वाले पांच पांडव कहे जाने वाले राजग समूह को उनके ताकत के अनुसार सम्मानित किया है.सूत्रों की मानें तो भाजपाई रणनीतिकारों ने एक सोची-समझी रणनीति के तहत बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की ज्यादातर शर्तों को स्वीकार कर किसी भी संभावित विवाद को जन्म लेने से पहले ही समाप्त करने का प्रयास किया है.

हालांकि भाजपा ने अपने दो ताकतवर नेताओं को पहले की भांति उपमुख्यमंत्री के रूप में मुख्यमंत्री के दोनों तरफ रखकर सत्ता समीकरण को साधने का प्रयास कर दूरगामी सोच को परिलक्षित कर दिया है. सूत्र बता रहे हैं कि भाजपाई रणनीतिकारों ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विशेष निर्देश पर नीतीश कुमार के उम्र, अनुभव और स्वच्छ राजनीतिक सफर को राजग के ताकत के रूप में स्वीकार कर परिस्थिति अनुकूल होने के बावजूद किसी दूसरे राजनीतिक प्रयोग को हवा नहीं दी .

कहा जा रहा है कि मंत्रीमंडल में शामिल होने वाले मंत्रियों के नामों की सूची पर दलों की ओर से एकतरफा निर्णय के बजाय राजग रणनीतिकारों द्वारा गुण-दोष के आधार पर अंतिम फैसला किया गया.पिछले दो दिनों से संभावित नामों की लंबी सूची पर बहुस्तरीय बैठक में चर्चा की गई लेकिन अंतिम निर्णय बुधवार को रात में गृहमंत्री अमित शाह के पटना प्रवास के दौरान व्यापक चर्चा के बाद लिया गया.

मंत्रीमंडल गठन में बुजुर्ग और अनुभवी नेताओं की सरपरस्ती में युवाओं व महिलाओं को महत्व देकर राजग ने राजद के एमवाई यानी मुस्लिम व यादव समीकरण के मुकाबले महिला व युवा के नए जुगलबंदी वाले नारे को पंख देने का प्रयास किया है. नीतीश कैबिनेट में शामिल 26 मंत्रियों में लगभग डेढ़ दर्जन पूर्व मंत्रियों को ही स्थान दिया गया है. नवगठित मंत्रीमंडल में कुल मंत्रियों में से तीन महिला और 15 अपेक्षाकृत युवा नेताओं को शामिल कर बिहार के विकास को सभी वर्गों तक तेज गति से पहुंचाने की योजना बनाई गई है.

नेता पुत्रों को भी तवज्जो दिया गया है. मंत्रीमंडल में केन्द्रीय मंत्री व हम नेता जीतन राम मांझी के पुत्र संतोष सुमन, उपेन्द्र कुशवाहा के पुत्र दीपक प्रकाश को शामिल किया गया है। हालांकि दीपक अभी किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं लेकिन गठबंधन के दौरान किए गए वादे के मुताबिक उपेन्द्र कुशवाहा की पार्टी को एक एमएलसी सीट देनी है उसके आधार पर ही इन्हें मौका मिला है. जहां एक तरफ जदयू कोटे से पूर्व केंद्रीय मंत्री स्वर्गीय दिग्विजय सिंह की बेटी श्रेयसी सिंह को मंत्री तो भाजपा कोटे से पहली बार चुनाव जीत कर आई पूर्व सांसद की पत्नी रमा निषाद को मंत्री बनाया गया है.

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