वैश्विक चुनौतियों का समाधान संवाद, शांति और सहयोग में निहित : बिरला


नयी दिल्ली, 27 अक्टूबर (वार्ता)
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा है कि वैश्विक चुनौतियों का स्थायी समाधान संघर्ष में नहीं, बल्कि संवाद, शांति और सहयोग में निहित है इसलिए जनता का विश्वास मजबूत करने के लिए संसदों को पारदर्शी, जवाबदेह तथा जनहित को प्राथमिकता देने वाले तरीकों से काम करने को महत्व देना चाहिए। श्री बिरला ने यहां संसद भवन के संविधान सदन में दो दिन चले 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच के समापन सत्र को संबोधित करते हुए मंगलवार को कहा कि बैठक के संयुक्त घोषणा-पत्र को अंगीकृत किये जाने की घोषणा की।

उन्होंने बताया कि संयुक्त घोषणा-पत्र में वैश्विक शासन व्यवस्था में ग्लोबल साउथ के अधिक प्रतिनिधित्व, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार और सीमापार आतंकवाद के खिलाफ कड़ा रुख अपनाने सहित महत्वपूर्ण मुद्दों को शामिल किया गया है। इसके साथ ही उन्होंने 13वें ब्रिक्स संसदीय मंच की अध्यक्षता चीन को सौंप दी।

श्री बिरला ने कहा कि ब्रिक्स देशों की पृष्ठभूमि, परिस्थितियां और चुनौतियां अलग-अलग हो सकती हैं लेकिन मानवता के कल्याण, शांति और समृद्धि के प्रति उनकी साझा प्रतिबद्धता इस समूह की ताकत है। उन्होंने राष्ट्रीय संप्रभुता के सम्मान, अंतरराष्ट्रीय विवादों के शांतिपूर्ण समाधान और सभी देशों को समान विकास अवसर उपलब्ध कराने पर बल दिया।

लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में स्थायी समाधान युद्ध में नहीं संवाद में है, संघर्ष में नहीं शांति में है और प्रतिस्पर्धा में नहीं, बल्कि सहयोग में निहित हैं। उन्होंने कहा कि वैश्विक शांति का अर्थ सभी के लिए सुरक्षा, सम्मान, न्याय और बेहतर भविष्य सुनिश्चित करना है। विशेष रूप से युवा पीढ़ी के लिए सुरक्षित और समृद्ध भविष्य का निर्माण करना वर्तमान नेतृत्व की जिम्मेदारी है।

लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि संसदें केवल कानून बनाने वाली संस्थाएं नहीं हैं, बल्कि संवाद, आम सहमति, जवाबदेही और जनविश्वास के महत्वपूर्ण केंद्र हैं। उन्होंने संसदों से बदलते समय के अनुरूप अधिक प्रभावी, पारदर्शी और जन-केंद्रित संस्थानों के रूप में विकसित होने का आह्वान किया।

श्री बिरला ने संसदीय कार्यप्रणाली में कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटल प्रौद्योगिकी के जिम्मेदार उपयोग पर जोर देते हुए कहा कि इनका उपयोग सांसदों की दक्षता बढ़ाने, संसदीय कामकाज को सुगम बनाने और नागरिकों की भागीदारी मजबूत करने में मदद कर सकता है। उन्होंने कहा कि तकनीक का उपयोग मानवीय मूल्यों, नैतिकता, पारदर्शिता और जवाबदेही के अनुरूप होना चाहिए।

लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि ब्रिक्स की सफलता तभी सार्थक होगी जब सदस्य देशों की प्रगति का लाभ व्यापक अंतरराष्ट्रीय समुदाय तक पहुंचे और वैश्विक निर्णय लेने की प्रक्रियाओं में ग्लोबल साउथ की आकांक्षाओं तथा प्राथमिकताओं को उचित प्रतिनिधित्व मिले।

श्री बिरला के अनुसार संयुक्त घोषणा-पत्र में संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों, संप्रभु समानता, परस्पर सम्मान, देशों के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करने और अंतरराष्ट्रीय विवादों के शांतिपूर्ण समाधान के प्रति प्रतिबद्धता दोहरायी गयी। इसमें वैश्विक शासन व्यवस्था में ग्लोबल साउथ को अधिक प्रतिनिधित्व देने के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधारों का समर्थन किया गया।

लोकसभा अध्यक्ष ने घोषणा-पत्र में सीमापार आतंकवाद, आतंकवाद के वित्तपोषण और आतंकवादियों को सुरक्षित ठिकाने उपलब्ध कराने की निंदा करते हुए आतंकवाद के प्रति शून्य सहिष्णुता तथा दोहरे मापदंडों से बचने पर जोर दिया गया। इसमें डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना के विस्तार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता के नैतिक उपयोग और जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए समान लेकिन पृथक उत्तरदायित्वों के सिद्धांत के पालन जैसे मुद्दे भी शामिल हैं।

संसद भवन परिसर स्थित संविधान सदन में 26 और 27 अक्टूबर को आयोजित 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच का मुख्य विषय जन-केंद्रित विकास के लिए संसदों को सशक्त बनाना था।

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