
मध्य प्रदेश के कान्हा टाइगर रिजर्व में बाघों की संदिग्ध मौतों और कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (CDV) के खतरे पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने बेहद गंभीर रुख अपनाया है। मुख्य न्यायाधीश अल्पेश यशवंत कोगजे और न्यायमूर्ति विवेक जैन की युगलपीठ ने सितंबर-अक्टूबर के दौरान हुई दो और बाघों की मौत के कारणों की उच्च स्तरीय जांच कर रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं।
याचिका में दावा किया गया है कि कान्हा में अब तक 20 बाघों की संदिग्ध मौतों के पीछे सीडीवी संक्रमण की आशंका है, जो आवारा कुत्तों और साझा जलस्रोतों के जरिए फैल रहा है। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि टाइगर रिजर्व के आसपास दो हजार से अधिक कुत्तों का टीकाकरण किया जा चुका है। वहीं, कोर्ट ने वन्यजीव संरक्षण के लिए मिलने वाली धनराशि में कटौती के मामले में केंद्र सरकार से जवाब तलब किया है। इस मामले की अगली सुनवाई अब 16 नवंबर को होगी।
