स्टॉकहोम/ब्रसेल्स | स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) की ताजा रिपोर्ट 2026 के अनुसार, यूरोप एक बार फिर वैश्विक रक्षा बाजार में महाशक्ति बनकर उभरा है। यूक्रेन युद्ध और बदलती अंतरराष्ट्रीय स्थितियों के बीच यूरोपीय संघ के हथियार निर्यात में 36% की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो अमेरिका और चीन की वृद्धि दर से कहीं अधिक है। अब वैश्विक हथियार बाजार में यूरोप की हिस्सेदारी 28% तक पहुंच गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि रूस और चीन के दबदबे को कम करते हुए यूरोप अब हथियारों के उत्पादन और निर्यात का नया वैश्विक केंद्र बन गया है, जिससे एक नए सैन्य युग की शुरुआत हो रही है।
यूरोप के इस उत्थान के बीच रूस को रक्षा क्षेत्र में अब तक का सबसे बड़ा झटका लगा है। सिपरी की रिपोर्ट बताती है कि रूसी हथियारों के निर्यात में 64% की ऐतिहासिक गिरावट आई है, जो यूरोप के कुल निर्यात से अब चार गुना कम है। आधुनिक युद्धों में रूसी तकनीक के कम प्रभावी साबित होने और यूक्रेन युद्ध के दबाव के कारण रूस के पुराने ग्राहकों ने उसका साथ छोड़ दिया है। यहां तक कि चीन जैसे देश भी अब जेट इंजनों के लिए रूस पर निर्भर नहीं हैं। रूस की रक्षा अर्थव्यवस्था के चरमराने का सीधा फायदा यूरोपीय देशों को मिला है, जिन्होंने तेजी से इस खाली बाजार पर कब्जा कर लिया है।
यूरोप ने ‘सिक्योरिटी एक्शन फॉर यूरोप’ (SAFE) कार्यक्रम के तहत रक्षा क्षेत्र में 150 अरब यूरो का विशाल निवेश किया है, जिसका उद्देश्य अमेरिका पर सुरक्षा निर्भरता को कम करना है। डोनाल्ड ट्रंप की ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति ने यूरोपीय देशों को आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित किया है, जिसके तहत यूक्रेन को भी अब तक 195 अरब यूरो की सैन्य सहायता भेजी जा चुकी है। हालांकि, पूर्वी यूरोप के देश अब भी एफ-35 जेट जैसी उन्नत मिसाइल प्रणालियों के लिए अमेरिका की ओर देखते हैं, लेकिन समग्र रूप से यूरोप अब अपनी सैन्य प्रणालियों को मजबूत कर एक स्वतंत्र सुरक्षा ढांचे की ओर बढ़ रहा है।

