
जबलपुर। ‘भगवान की पूजा करोगे तो पुण्य बंधेगा,और अपने स्वरूप को जानोगे तो जीवन पुण्य बनेगा, उपरोक्त उद्गार भावनायोग प्रणेता मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज ने श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान के तीसरे दिवस व्यक्त किये । प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी एवं सुवोध कामरेड ने बताया मुनि श्री ने प्रात: जैन मुनि की उत्कृष्ट चर्या का पालन करते हुये अपने हाथों से दाड़ी मूंछ आदि के बाल को अपने हाथों से उखाड़ एवं सोमवार को उपवास रहा।
मुनि श्री ने कहा कि इस धर्म सभा में ऐसा कोई भी व्यक्ती नहीं होगा जो णमोकार महामंत्र को नहीं जानता हो णमोकार महामंत्र अर्थात पंचपरमेष्ठी को स्मरण करना। श्री सिद्धचक्र विधान में प्रतिदिन पंचपरमेष्ठी की पूजन की जाती है, भगवान कहते है,कि तुम मुझे जपोगे तो जपते रह जाओगे और यदि हृदय में धारण कर लोगे तो तर जाओगे उन्होंने कहा कि भगवान कीपूजा करने से पुण्य बढ़ता है,और स्वरूप जानने से जीवन पुण्य बनता है। इस मौके पर मुनि श्री ने ये भी कहा कि पुण्य ऐसे नहीं बंधता,शास्त्रों में पुण्य के लिए विशुद्धि ही पुण्य का मुख्य कारण है और धर्म को धारण करने वाला ही सिद्धचक्र में प्रवेश करता है।
