ओबीसी महिला को सामान्य वर्ग में नियुक्ति का हक: हाईकोर्ट

जबलपुर: मप्र हाईकोर्ट ने आयुर्वेद कम्पाउंडर भर्ती मामले में रीवा निवासी ओबीसी महिला अभ्यर्थी संगीता पटेल को राहत देते हुए उसकी पात्रता की पुष्टि कर नियुक्ति पत्र जारी करने के निर्देश दिए हैं। जस्टिस विवेक अग्रवाल की एकलपीठ ने फैसले में स्पष्ट किया कि सामान्य महिला वर्ग की अंतिम चयनित अभ्यर्थी से अधिक अंक प्राप्त करने वाली आरक्षित वर्ग की महिला को नियमानुसार सामान्य श्रेणी की मेरिट में स्थान पाने के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता।

दरअसल, मध्य प्रदेश प्रोफेशनल एग्जामिनेशन बोर्ड ने 24 जनवरी 2013 को आयुर्वेद कम्पाउंडर भर्ती का विज्ञापन जारी किया था। रीवा के वार्ड नंबर तीन निवासी संगीता पटेल ने लिखित परीक्षा में 100 में से 51 अंक प्राप्त किए थे। उसका दावा था कि सामान्य महिला वर्ग की अंतिम चयनित अभ्यर्थी से अधिक अंक होने के बावजूद उसे चयन सूची में स्थान नहीं दिया गया। आयुष संचालनालय में प्रस्तुत उसका अभ्यावेदन 29 सितंबर 2015 को खारिज कर दिया गया था।

सात अक्टूबर को हुई सुनवाई में याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि निर्धारित पात्रताएं पूरी करने वाली आरक्षित वर्ग की महिला अभ्यर्थी को मेरिट के आधार पर सामान्य श्रेणी में चयन का अवसर मिलना चाहिए। भर्ती बोर्ड की ओर से कहा गया कि सभी पद भरे जा चुके हैं और कोई रिक्त पद उपलब्ध नहीं है। हालांकि, हाईकोर्ट ने मामले के तथ्यों और लागू कानूनी सिद्धांतों पर विचार करते हुए याचिकाकर्ता को राहत दी। अदालत ने संबंधित अधिकारियों को उसकी पात्रता की पुष्टि कर नियुक्ति पत्र जारी करने के निर्देश दिए। आदेश के अनुसार नियुक्ति आदेश जारी होने की तारीख से याचिकाकर्ता की वरिष्ठता, वेतन निर्धारण और अन्य सेवा लाभ निर्धारित किए जाएंगे।

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