ओडिशा सरकार ने चक्रवात को लेकर झूठी खबरें प्रसारित करने वालों को दी कानूनी कार्रवाई की चेतावनी

भुवनेश्वर, 26 अक्टूबर (वार्ता) ओडिशा सरकार ने चक्रवात को लेकर झूठे और अटकलों पर आधारित पूर्वानुमान फैलाने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी है। सरकार ने आगाह किया है कि बिना पुष्टि की गई चेतावनियों से लोगों में दहशत फैल सकती है, आर्थिक गतिविधियां बाधित हो सकती हैं और आपदा से निपटने की तैयारियों पर असर पड़ सकता है।

विशेष राहत आयुक्त (एसआरसी) कार्यालय ने एक परामर्श जारी कर सोशल मीडिया, डिजिटल मंचों और कुछ मीडिया चैनलों पर चक्रवात के संभावित मार्ग, उसके तट से टकराने के स्थान, समय और प्रभावों को लेकर अपुष्ट जानकारी प्रसारित किए जाने पर चिंता जताई है। परामर्श में कहा गया है कि कुछ लोग और स्वयंभू मौसम विशेषज्ञ वैज्ञानिक पुष्टि या भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के आधिकारिक पूर्वानुमानों का हवाला दिए बिना ऐसी भविष्यवाणियां कर रहे हैं।

एसआरसी ने कहा कि भ्रामक पूर्वानुमानों से लोग घबराकर जरूरी सामान की खरीदारी कर सकते हैं, बाजार में कृत्रिम कमी पैदा हो सकती है और किसान समय से पहले फसलों की कटाई कर सकते हैं। इससे आपदा प्रबंधन की आधिकारिक व्यवस्था पर लोगों का भरोसा भी कमजोर हो सकता है।

एसआरसी ने मीडिया संस्थानों, डिजिटल सामग्री तैयार करने वालों, सोशल मीडिया मंचों और आम लोगों से मौसम संबंधी जानकारी साझा करते समय सावधानी बरतने की अपील की है और कहा कि सभी पूर्वानुमानों की पुष्टि भारत मौसम विज्ञान विभाग के आधिकारिक बुलेटिनों तथा एसआरसी और अन्य सक्षम प्राधिकरणों की ओर से जारी परामर्शों से की जानी चाहिए।

सरकार ने कहा है कि मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) मौसम के पूर्वानुमान, चक्रवात संबंधी बुलेटिन और खराब मौसम की चेतावनियां जारी करने वाली नामित राष्ट्रीय एजेंसी है। विशेष राहत आयुक्त (एसआरसी) कार्यालय आईएमडी और अन्य एजेंसियों के साथ समन्वय कर आपदा संबंधी परामर्श जारी करता है तथा पूरे ओडिशा में तैयारियों, लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने और राहत एवं बचाव उपायों की निगरानी करता है।

सरकार ने आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 का हवाला देते हुए चेतावनी दी कि आपदा को लेकर झूठी चेतावनियां प्रसारित करने पर दंडात्मक कार्रवाई हो सकती है। अधिनियम की धारा 54 के तहत आपदा या उसकी गंभीरता अथवा व्यापकता के बारे में झूठा अलार्म या चेतावनी देने या प्रसारित करने और उससे लोगों में दहशत फैलने पर एक वर्ष तक की कैद या जुर्माने का प्रावधान है।

परामर्श में अधिनियम की धारा 51 का भी उल्लेख किया गया है। इस धारा के तहत अधिकृत अधिकारियों को उनके कर्तव्यों का निर्वहन करने से रोकने या सक्षम प्राधिकारियों के वैध निर्देशों का पालन करने से इनकार करने पर दंड का प्रावधान है।

सरकार ने कहा कि कानून के अनुसार, जहां भी आवश्यक होगा, जानबूझकर आपदा संबंधी झूठी चेतावनियां फैलाने, लोगों में दहशत पैदा करने या आपदा प्रबंधन कार्यों में बाधा डालने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

एसआरसी ने नागरिकों से आईएमडी के आधिकारिक मौसम बुलेटिनों तथा एसआरसी, जिला प्रशासन और अन्य सक्षम प्राधिकरणों की ओर से जारी परामर्शों पर भरोसा करने की अपील की। उसने लोगों से सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहे अपुष्ट संदेशों, चक्रवात के संभावित मार्गों से जुड़ी अटकलों और डर पैदा करने वाली भविष्यवाणियों को आगे साझा नहीं करने का आग्रह किया।

 

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