
चार समकालीन कलाकारों की प्रदर्शनी में उथल-पुथल, मानवीय संवेदनाओं और आशा के नए आयामों की कलात्मक अभिव्यक्ति
नई दिल्ली, अक्टूबर 2026: समकालीन कला को समर्पित मंच आर्टकृति (ArtKriti) ने चार कलाकारों की सामूहिक प्रदर्शनी ‘थ्रेशोल्ड ऑफ ट्रेसेज़: स्टिच्ड विद एन एम्बर थ्रेड’ (Threshold of Traces: Stitched with an Amber Thread) का आयोजन किया है। यह प्रदर्शनी 25 से 29 अक्टूबर 2026 तक नई दिल्ली के इंडिया हैबिटेट सेंटर स्थित विजुअल आर्ट गैलरी में आयोजित की जा रही है।
प्रदर्शनी में चार समकालीन कलाकारों सिद्धार्थ झरिया, सौमिक नाग, सोनिया सरीन और गौरव चावला की कलाकृतियां प्रस्तुत की गई हैं। ये कलाकार फिगरेटिव पेंटिंग, प्राकृतिक दृश्यों, मूर्तिकला और अमूर्त कला जैसी अलग-अलग विधाओं के माध्यम से जीवन में आने वाले बदलावों, संघर्षों, मानवीय संवेदनाओं और उम्मीद की अभिव्यक्ति करते हैं। प्रदर्शनी का उद्घाटन 25 अक्टूबर 2026 को शाम 6 से 8 बजे के बीच आयोजित स्वागत समारोह के साथ हुआ।
यह प्रदर्शनी कला की विभिन्न शैलियों को अलग-अलग रूपों में देखने के बजाय उन्हें जीवन के संघर्ष और अस्तित्व की एक साझा यात्रा के रूप में प्रस्तुत करती है। इसमें उस स्थिति को समझने का प्रयास किया गया है, जहां मानव आकृति धीरे-धीरे प्राकृतिक दृश्य में बदलती दिखाई देती है या जहां धरती की संरचना भावनाओं की अमूर्त अभिव्यक्ति का रूप ले लेती है। प्रदर्शनी का मुख्य संदेश है कि आशा केवल कोमल या शांत भावना नहीं होती, बल्कि कठिन परिस्थितियों से संघर्ष करके हासिल की गई एक मजबूत शक्ति भी हो सकती है।
प्रदर्शनी का शीर्षक भी इसी विचार को दर्शाता है। ‘थ्रेशोल्ड’ यानी दहलीज, एक ऐसी अवस्था का प्रतीक है जहां कोई चीज अपने पुराने स्वरूप से निकलकर नए रूप की ओर बढ़ रही होती है। वहीं ‘ट्रेस’ यानी निशान, उन अनुभवों और बदलावों की छाप को दर्शाता है जो समय के साथ हमारे भीतर और आसपास रह जाते हैं।
शीर्षक में प्रयुक्त ‘एम्बर थ्रेड’ यानी सुनहरा धागा इन चारों कलाकारों की रचनाओं को आपस में जोड़ने वाले विचार का प्रतीक है। एम्बर एक प्राकृतिक पदार्थ है, जो पेड़ों से निकलने वाले रेज़िन के समय के साथ कठोर होने से बनता है और अपने भीतर प्रकाश को संजोए रखता है। वहीं धागा जोड़ने और टूटे हुए हिस्सों को फिर से एक करने का प्रतीक है। इन दोनों के माध्यम से प्रदर्शनी यह संदेश देती है कि जीवन के घाव और संघर्ष केवल पीड़ा के प्रतीक नहीं हैं, बल्कि वे नई शुरुआत और निरंतर आगे बढ़ने की प्रेरणा भी बन सकते हैं।
आर्टकृति के संस्थापक और कलाकार गौरव चावला ने प्रदर्शनी के बारे में कहा, “थ्रेशोल्ड ऑफ ट्रेसेज़ हमें याद दिलाती है कि जब हम जीवन में टूटते हैं, तो भीतर से खाली नहीं होते, बल्कि नए रूप में खिलने की क्षमता विकसित करते हैं। इस प्रदर्शनी में शामिल चारों कलाकार अलग-अलग माध्यमों में काम करते हैं, लेकिन सभी एक ही क्षण को अभिव्यक्त कर रहे हैं, जहां पीड़ा और प्रकाश एक ही अनुभव का हिस्सा बन जाते हैं।”
उथल-पुथल, मानवीय अस्तित्व और आशा की कलात्मक अभिव्यक्ति
इस प्रदर्शनी में तीन प्रमुख विचार उभरकर सामने आते हैं — उथल-पुथल, मानवीय अस्तित्व और आशा।
सौमिक नाग के प्राकृतिक दृश्यों और गौरव चावला की अमूर्त पेंटिंग्स में प्रकृति तथा भावनाओं की हलचल दिखाई देती है। वहीं सिद्धार्थ झरिया की मानवीय आकृतियां संवेदनशीलता और प्रकाश के बीच संतुलन दर्शाती हैं। सोनिया सरीन की मूर्तियां शरीर और प्राकृतिक परिदृश्य के बीच बदलते संबंधों को सामने लाती हैं।
प्रदर्शनी में प्रस्तुत चार कलात्मक श्रृंखलाएं — ‘ट्रेसेज़ ऑफ द फ्लेश’, ‘द वेदर्ड टेरेन’, ‘द रुइन एंड द ब्लूम’ और ‘द वोल्कैनिक कोर’ — मिलकर संघर्ष, परिवर्तन और आशा की एक साझा कहानी प्रस्तुत करती हैं।
प्रदर्शनी में शामिल कलाकार
सिद्धार्थ झरिया — ‘ट्रेसेज़ ऑफ द फ्लेश’ (मानवीय आकृतियां)
इस प्रदर्शनी में सिद्धार्थ झरिया ने जलरंगों के माध्यम से मानव शरीर और उसकी संवेदनशीलता को अभिव्यक्त किया है। उनकी कलाकृतियों में मानव आकृतियां किसी स्थिर या पूर्ण अवस्था में दिखाई नहीं देतीं, बल्कि वे लगातार बदलती हुई प्रतीत होती हैं।
जलरंगों की पारदर्शिता और उनके स्वाभाविक प्रवाह के माध्यम से कलाकार शरीर की नाजुकता, भावनाओं और प्रकाश के बीच एक अनूठा संबंध स्थापित करते हैं।
अपनी कलात्मक प्रक्रिया के बारे में सिद्धार्थ कहते हैं, “मैं मानव शरीर को कभी एक पूर्ण या स्थिर रूप में नहीं देखता। मेरी हर आकृति परिवर्तन की अवस्था में होती है, जहां संवेदनशीलता और प्रकाश एक साथ मौजूद होते हैं। जलरंगों की विशेषता यह है कि कई बार रंग स्वयं तय करते हैं कि उनकी गर्माहट कहां और कैसे उभरेगी।”
सौमिक नाग — ‘द वेदर्ड टेरेन’ (प्राकृतिक दृश्य)
सौमिक नाग के लिए प्राकृतिक दृश्य केवल किसी स्थान की सुंदरता को चित्रित करने का माध्यम नहीं हैं, बल्कि वे प्रकृति पर समय और परिस्थितियों के प्रभाव को दर्शाते हैं।
अपनी श्रृंखला ‘द वेदर्ड टेरेन’ में उन्होंने लगभग सभी रंगों को छोड़कर केवल वैन डाइक ब्राउन और काले रंग का उपयोग किया है। इन दो रंगों के माध्यम से वे घाटियों, पर्वतीय संरचनाओं और प्राकृतिक बदलावों की गहराई को प्रस्तुत करते हैं।
उनकी कलाकृतियों में सटीकता और सहजता का अनूठा संतुलन दिखाई देता है। एक ओर वे पर्वतीय संरचनाओं का सूक्ष्म अध्ययन करते हैं, वहीं दूसरी ओर रंगों और रेखाओं को स्वाभाविक रूप से विकसित होने देते हैं।
सौमिक की पेंटिंग्स प्रतिष्ठित वकीलों और लेखकों के निजी संग्रहों में शामिल हैं। उन्होंने वर्षों से अनेक प्रदर्शनियों में भाग लिया है। उनकी एक उल्लेखनीय प्रदर्शनी उत्तराखंड के चमोली जिले के घनसाली गांव में आयोजित हुई थी, जहां उनकी कलाकृतियों को पारंपरिक गैलरी के बजाय खुले वातावरण में स्थानीय लोगों के बीच प्रदर्शित किया गया था।
उनकी वर्तमान कलाकृतियां उत्तराखंड की नीति घाटी के प्राकृतिक दृश्यों, वहां की शांति और समय के साथ बदलते भू-दृश्यों से प्रेरित हैं।
सौमिक कहते हैं, “इस श्रृंखला में मैंने लगभग सभी रंगों को छोड़कर केवल वैन डाइक ब्राउन और काले रंग का उपयोग किया। यह मेरे लिए कोई सीमा नहीं थी, बल्कि इससे अभिव्यक्ति की नई संभावनाएं खुलीं। मेरे काम में सटीकता और सहजता एक-दूसरे के विपरीत नहीं, बल्कि एक-दूसरे के सहयोगी हैं।”
सोनिया सरीन — ‘द रुइन एंड द ब्लूम’ (मूर्तिकला)
सोनिया सरीन की मूर्तियां टूटन, बदलाव और पुनर्निर्माण की भावनाओं को दर्शाती हैं। उनकी श्रृंखला ‘द रुइन एंड द ब्लूम’ में मानव शरीर की आकृतियां धीरे-धीरे प्राकृतिक परिदृश्यों में बदलती दिखाई देती हैं।
उनकी कला इस विचार पर आधारित है कि टूटना और विकसित होना एक-दूसरे के विपरीत नहीं हैं, बल्कि कई बार नई शुरुआत का आधार वही अनुभव बनते हैं जो हमें सबसे अधिक चुनौती देते हैं।
अपनी कलात्मक सोच को व्यक्त करते हुए सोनिया कहती हैं, “मेरी मूर्तियां एक घाव से शुरू होती हैं और एक आश्रय में बदल जाती हैं। मुझे उस क्षण में दिलचस्पी है जब कोई आकृति शरीर से निकलकर प्राकृतिक दृश्य का रूप लेने लगती है और जब टूटन तथा विकास एक ही पदार्थ से जन्म लेते हैं।”
उनकी मूर्तियां यह संदेश देती हैं कि जीवन में आने वाली कठिनाइयां नई संभावनाओं और विकास का आधार बन सकती हैं।
गौरव चावला — ‘द वोल्कैनिक कोर’ (अमूर्त कला)
आर्टकृति के संस्थापक गौरव चावला इस प्रदर्शनी में एक कलाकार के रूप में भी अपनी अमूर्त कलाकृतियां प्रस्तुत कर रहे हैं।
उनकी श्रृंखला ‘द वोल्कैनिक कोर’ भावनाओं की तीव्रता, आंतरिक संघर्ष और उनके विस्फोट को दर्शाती है। वे अपने कैनवास पर तेज गति और गहरी परतों में रंगों का उपयोग करते हैं। प्रत्येक नई परत पिछली परत के साथ संवाद करती प्रतीत होती है, जिससे एक गतिशील और ऊर्जावान दृश्य अनुभव बनता है।
गौरव के लिए अमूर्त कला केवल भावनाओं का चित्रण नहीं है, बल्कि उन भावनाओं को सीधे कैनवास पर महसूस करने और अभिव्यक्त करने की प्रक्रिया है।
वे कहते हैं, “मैं तेज गति और गहरी परतों में काम करता हूं, क्योंकि भावनाएं भी इसी तरह आगे बढ़ती हैं, बिल्कुल मौसम की तरह। हर नई परत अपने नीचे मौजूद परत से संवाद करती है। जब कोई पेंटिंग पूरी होती है, तो वह केवल तूफान का चित्रण नहीं करती, बल्कि उस क्षण को दर्शाती है जब तूफान प्रकाश में बदल जाता है।”
गौरव चावला नियमित रूप से कला समुदाय के साथ अपने अनुभव साझा करते हैं और उभरते कलाकारों को प्रोत्साहित करने के लिए प्रदर्शनियों, चर्चाओं तथा अनौपचारिक बैठकों का आयोजन करते हैं।
उनकी कलाकृतियां यूरोप, अमेरिका, सिंगापुर और भारत के कई निजी संग्रहों में शामिल हैं। वह अब तक कई एकल प्रदर्शनियों के साथ दुनिया भर में 65 से अधिक प्रतिष्ठित कला आयोजनों में भाग ले चुके हैं। वर्तमान में वह नई दिल्ली में रहते और कार्य करते हैं।
आर्टकृति के बारे में
आर्टकृति (ArtKriti) एक भारतीय समकालीन कला गैलरी और मंच है, जिसकी स्थापना कलाकार गौरव चावला ने की थी।
इस मंच का उद्देश्य समकालीन कला, डिजाइन और रचनात्मक अभिव्यक्ति को बढ़ावा देना तथा स्थापित और उभरते कलाकारों को अपनी कला प्रस्तुत करने के अवसर प्रदान करना है।
आर्टकृति विभिन्न कला प्रदर्शनियों, संवादों और रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से कलाकारों तथा कला प्रेमियों के बीच की दूरी को कम करने का प्रयास करता है।
यह मंच कला को केवल दीर्घाओं तक सीमित रखने के बजाय आम लोगों के जीवन का हिस्सा बनाने में विश्वास रखता है। साथ ही, यह कलाकारों को अपने व्यक्तिगत अनुभवों, विचारों और रचनात्मक प्रक्रियाओं को साझा करने के लिए एक स्वतंत्र मंच प्रदान करता है।
