130 मोहल्ले , 14 घोष दल , हजारों स्वयंसेवक

धार। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, धार नगर द्वारा रविवार को नगर की 14 बस्तियों जिसके अंतर्गत 130 मोहल्ले आते है उन सभी में बस्तीशः पथ संचलन एक साथ एक समय पर अलग अलग स्थान से निकाला गया। संघ द्वारा आयोजित इस पथ संचलन में हजारों स्वयंसेवक पूर्ण गणवेश में अनुशासनबद्ध होकर कदमताल करते नजर आए। नगर की अलग-अलग दिशाओं से निकले संचलनों ने पूरे धार नगर को संघमय बना दिया। प्रत्येक बस्ती में स्वयंसेवकों के अलग-अलग घोष दल आकर्षण का केंद्र रहे। नगर के सामाजिक, धार्मिक, व्यापारिक एवं विभिन्न संगठनों तथा नागरिकों ने पुष्पवर्षा, आरती और स्वागत के माध्यम से स्वयंसेवकों का अभिनंदन किया।

संचलन की तैयारियां पिछले एक माह से निरंतर चल रही थीं। 14 बस्तियों के स्वयंसेवकों ने अपने-अपने क्षेत्र में संचलन की व्यवस्था, घोष दलों का अभ्यास और अन्य तैयारियां कीं। संचलन में स्वयंसेवकों की वाहिनियां एक के पीछे एक अनुशासित ढंग से चल रही थीं। तीन पीढ़ियों के स्वयंसेवकों की सहभागिता ने आयोजन को विशेष स्वरूप प्रदान किया। छोटे बच्चों में भी संचलन में सम्मिलित होने को लेकर उत्साह दिखाई दिया। मातृशक्ति और छोटी बेटियों ने आरती उतारकर स्वयंसेवकों का स्वागत किया।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना वर्ष 1925 में डॉ. केशवराव बलिराम हेडगेवार ने की थी। संघ की शताब्दी यात्रा के अंतिम कार्यक्रम के अवसर पर धार नगर में आयोजित इस पथ संचलन को समाज के विभिन्न वर्गों का व्यापक सहयोग मिला। सामाजिक, धार्मिक और व्यापारिक संगठनों सहित अनेक नागरिकों ने स्वागत कर स्वयंसेवकों का उत्साहवर्धन किया।

संचलन में तीन पीढ़ियों के स्वयंसेवकों की सहभागिता, मातृशक्ति का स्वागत, बच्चों का उत्साह और नगर के नागरिकों की उपस्थिति विशेष रूप से उल्लेखनीय रही। आयोजन ने संगठनात्मक अनुशासन, सामूहिकता और सामाजिक सहभागिता का दृश्य प्रस्तुत किया।

 

14 घोष दलों ने किया सामूहिक वादन।

हजारों स्वयंसेवकों ने पूर्ण गणवेश में की अनुशासित कदमताल।

नगर की विभिन्न दिशाओं में दिखाई दिया संचलन का भव्य स्वरूप।

 

नगर में हुए कार्यक्रमों में वक्ताओं ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 वर्ष की यात्रा केवल एक संगठन की यात्रा नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन, सामाजिक जागरण और राष्ट्रभावना के विस्तार की यात्रा है। आज संघ भारत सहित विश्व के 39 देशों में विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से कार्य कर रहा है, वहीं भारत में संघ की लगभग 80 हजार शाखाओं के माध्यम से स्वयंसेवक राष्ट्रसेवा और समाज जागरण के कार्य में जुटे हैं। पिछले 101 वर्षों से जो ध्येय संगठन का पहले दिन था , वो ही ध्येय आज भी है । इस ध्येनिष्ठा के पीछे जो कारण है वो संघ की साधना स्थली पर लगाने वाली नित्य शाखा । उस शाखा में होने वाले कार्यक्रम दिखने में बहुत छोटे लगये है , प्रासंगिक नहीं लगते । पर उन्हीं कार्यक्रम से सामान्य नागरिक से लेकर देश के सर्वोच्च पद तक हमारा स्वयंसेवक है । संघ के स्वयंसेवक प्रतिदिन भारत माता का वंदन करते हुए राष्ट्र के प्रति समर्पण, अनुशासन और सेवा का संकल्प लेते हैं। संघ जिस विचार को वर्षों से समाज के बीच रखता आया है, आज समाज का एक बड़ा वर्ग भी उन विचारों को अपनाकर आगे बढ़ रहा है। संघ की शाखा में शामिल होना और स्वयंसेवक के रूप में कार्य करना गर्व एवं गौरव का अनुभव कराता है।

संघ समाज के विभिन्न क्षेत्रों में अनेक सेवा कार्यों के माध्यम से सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास कर रहा है। शिक्षा, सेवा, सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण और राष्ट्रभावना के विस्तार जैसे विषयों पर स्वयंसेवक निरंतर सक्रिय हैं।

संघ की 100 वर्षों की यात्रा में समाज में अनेक सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिले हैं। जहाँ एक ओर विभिन्न कारणों से समाज को विभाजित करने के प्रयास होते रहे हैं, वहीं संघ समाज को जोड़ने, सामाजिक समरसता बढ़ाने और लोगों में राष्ट्रीय चेतना जागृत करने के लिए निरंतर कार्य कर रहा है।

आज युवाओं का एक बड़ा वर्ग राष्ट्रसेवा, अनुशासन और सामाजिक उत्तरदायित्व के विचारों से जुड़ रहा है। यह युवा वर्ग अपने कार्यों और विचारों के माध्यम से समाज में सकारात्मक भूमिका निभा रहा है। राष्ट्र और समाज के प्रति जागरूकता का यह विस्तार संघ की दीर्घकालीन यात्रा का महत्वपूर्ण पक्ष है।

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