
नई दिल्ली, संघ प्रमुख मोहन भागवत द्वारा विजयदशमी संबोधन में उठाए गए सवालों पर पलटवार करते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री व राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने संघ प्रमुख के आरोपों को खारिज करते हुए इसे काल्पनिक डर पैदा करने का प्रयास बताया है.
सिब्बल ने कहा कि भारत का विपक्ष या आम जनता जब भी बदलाव की मांग करती है तो उनका मतलब केवल लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण चुनावों के जरिए सरकार बदलना होता है न कि नेपाल या बंगलादेश जैसी हिंसक अराजकता फैलाना होता है. सिब्बल ने कहा कि लोकतांत्रिक माध्यमों से यदि देश की जनता सत्ता बदलती है तो उसे विदेशी साजिश कहना गलत होगा. सिब्बल ने साफ कहा कि विभिन्न संगठनों के छात्रों द्वारा शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन को अपराध की श्रेणी में रखकर मुकदमा दायर करना सही नहीं है. आज का युवा सिर्फ अपनी हक की बात कर रहा है . उसने किसी भी स्तर पर हिंसा का सहारा नहीं लिया है इसलिए उन्हें गलत तथ्यों के आधार पर निशाना बनाना सही नहीं है.
