
मोरवन। कभी गाद, कचरे और बदहाली से जूझने वाली गंभीरी नदी आज अपनी खूबसूरती से लोगों को आकर्षित कर रही है। नदी में खिले सैकड़ों कमल के फूलों ने पूरे क्षेत्र का नजारा बदल दिया है। कमल के फूलों से सजी गंभीरी नदी अब प्रकृति प्रेमियों और ग्रामीणों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गई है। इस मनमोहक दृश्य को देखने के लिए दूर-दराज से लोग पहुंच रहे हैं।
गांव की पवित्र गंभीरी नदी लंबे समय तक गंदगी और गाद की समस्या से जूझती रही। हालात यह थे कि लोग नदी के पास जाने से भी बचते थे। लेकिन पर्यावरण प्रेमी नेपाल रॉय ने नदी के संरक्षण का संकल्प लिया और करीब दो वर्ष पहले नदी में कमल की चार-पांच जड़ें रोपीं। इसके बाद वाटरवाक्स के कर्मचारियों वीरम बंजारा, पप्पू बंजारा और मोहन बंजारा ने नदी की सफाई और कमल के पौधों के संरक्षण की जिम्मेदारी संभाली।
लगातार मेहनत, सफाई और संरक्षण का परिणाम अब देखने को मिल रहा है। आज गंभीरी नदी में सैकड़ों कमल के फूल खिल रहे हैं, जो नदी की सुंदरता में चार चांद लगा रहे हैं। खिलखिलाते कमल न केवल प्राकृतिक सौंदर्य को दर्शा रहे हैं, बल्कि इंसानों की मेहनत और पर्यावरण संरक्षण की भावना को भी बयां कर रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि कुछ समय पहले तक बदहाल नजर आने वाली यह नदी अब उम्मीद और हरियाली की मिसाल बन चुकी है। वाटर पार्क के समीप नदी का बदला हुआ स्वरूप लोगों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति प्रेरणा दे रहा है।
गंभीरी नदी की यह कहानी बताती है कि यदि सामूहिक प्रयास और संरक्षण की भावना हो तो प्रकृति को फिर से संवारा जा सकता है। आज यह नदी क्षेत्र में सुंदरता, शांति और सकारात्मक बदलाव का प्रतीक बन गई है।
