कोलकाता, (वार्ता) पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के चोरबगान दुर्गा पूजा पंडाल में हुई दुखद भगदड़ के मामले में एक फोरेंसिक रिपोर्ट में बड़ा खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, पंडाल के अंदर लगे एयर-कंडीशनिंग सिस्टम में गंभीर खामियां थीं और आयोजकों की ओर से भारी लापरवाही बरती गई थी। पुलिस सूत्रों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।
लालबाजार (कोलकाता पुलिस मुख्यालय) के सूत्रों ने संकेत दिया कि फोरेंसिक विशेषज्ञों ने पूजा पंडाल के आंतरिक हिस्से की गहन जांच की। उन्होंने पाया कि पंडाल के विशाल आकार और सप्तमी के दिन उमड़ी भारी भीड़ को देखते हुए वहां मौजूद 134 टन की कूलिंग क्षमता पूरी तरह से अपर्याप्त थी।
विशेषज्ञों की रिपोर्ट में नोट किया गया है कि पंडाल में उसकी क्षमता से कहीं अधिक भीड़ भरी हुई थी, जहां हजारों श्रद्धालु ठसाठस मौजूद थे। वहां लगा 134-टन का एसी सिस्टम लोगों के शरीर से निकलने वाली अत्यधिक गर्मी और उमस को नियंत्रित करने में असमर्थ साबित हुआ। अत्यधिक भीड़ के दबाव के कारण एसी इकाइयों ने ठीक से काम करना बंद कर दिया और उनकी कूलिंग क्षमता पूरी तरह से ध्वस्त हो गई।
फोरेंसिक रिपोर्ट में पंडाल आयोजकों की ओर से गंभीर लापरवाही को भी उजागर किया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, आयोजक पूजा के दिनों में जुटने वाली संभावित भीड़ का सही आकलन करने में विफल रहे। हवा की आवाजाही सुनिश्चित करने और श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को ध्यान में रखने के बजाय, उन्होंने केवल एयर-कंडीशनिंग सिस्टम स्थापित कर दिया और कथित तौर पर अपनी जिम्मेदारियों की अनदेखी की। इससे सुरक्षा के गंभीर खतरे पैदा हुए और सुरक्षा प्रोटोकॉल का उल्लंघन हुआ।
उल्लेखनीय है कि गत 17 अक्टूबर की शाम को दुर्गा पूजा उत्सव के दौरान पंडाल में मची भगदड़ में 19 लोगों की मौत हो गई थी और 25 अन्य घायल हो गए थे। इस घटना ने पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा के त्योहार पर शोक की लहर फैला दी थी।
Sat Oct 24 , 2026
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