यरूशलम, 23 अक्टूबर (वार्ता) युद्ध के दोबारा शुरू होने की बढ़ती आशंकाओं के बीच, इजरायल की सेना के प्रमुख (चीफ ऑफ स्टाफ) लेफ्टिनेंट जनरल इयाल जमीर 27 अक्टूबर को होने वाले इजरायली संसद (नेसेट) के चुनावों से पहले ईरान पर हमले की कोई जरूरत महसूस नहीं करते हैं। चैनल 13 ने गुरुवार को यह जानकारी दी।
हालिया निजी बैठक के दौरान श्री जमीर के हवाले से कहा गया, ” हमें चुनाव से पहले ईरान पर हमला करने की जरूरत नहीं दिखती है। अगर हम यह तय करते हैं कि ईरान पर हमला जरूरी है, तो हम इसे अंजाम देंगे।”
प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के मुख्य प्रतिद्वंद्वी और ‘याशर’ पार्टी के नेता गादी आइजनकोट ने भी गुरुवार को ऐसे ही विचार व्यक्त किए। उन्होंने चैनल 13 से कहा, ” ईरान से कोई प्रत्यक्ष या तात्कालिक खतरा नहीं है, जिसके लिए चुनाव से पहले युद्ध की आवश्यकता हो।”
श्री नेतन्याहू को आलोचकों के इन आरोपों का सामना करना पड़ रहा है कि वह चुनाव को प्रभावित करने या टालने के लिए ईरान के खिलाफ युद्ध फिर से शुरू करने का दबाव बना रहे हैं, हालांकि उन्होंने इस आरोप का खंडन किया है।
इस बीच, ईरानी सरकारी टेलीविजन ने गुरुवार को बताया कि होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान के हमलों या समुद्री बारूदी सुरंगों की चपेट में आने से रात भर में सात तेल टैंकरों में आग लग गई या वे क्षतिग्रस्त हो गए। इन घटनाओं में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।
रिपोर्ट में ईरान के आईआरजीसी नौसेना का हवाला दिया गया, जिसने चेतावनी दोहराई कि यदि अमेरिका ने वाणिज्यिक जहाजों को जलडमरूमध्य से गुजारने में मदद जारी रखी, तो क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया जाएगा।यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (यूकेएमटीओ) के अनुसार, वाणिज्यिक जहाजों पर हमलों में बढ़ोतरी के बीच ये ताजा घटनाएं सामने आई हैं। मार्च में युद्ध के शुरुआती हफ्तों के बाद से अक्टूबर में सबसे ज्यादा हमले दर्ज किए गए हैं।यूकेएमटीओ ने इन ताजा घटनाओं की रिपोर्ट जारी नहीं की है और कहा है कि कई शिपिंग कंपनियां अब हमलों की रिपोर्ट
देने से कतरा रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इस व्यवधान के बावजूद तेल उत्पादक कच्चे तेल की आपूर्ति बनाए रखने में सफल रहे हैं, लेकिन इसके लिए लागत लगातार बढ़ रही है।
ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने बुधवार को कहा था कि उनका देश अपनी रक्षा की तैयारी के साथ-साथ कूटनीति के रास्ते भी खुले रख रहा है।
ईरान ने यह भी चेतावनी दी है कि उसने 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के हमलों से शुरू हुए इस संघर्ष से सैन्य सबक सीखे हैं। हाल के दिनों में ईरान ने संकेत दिया है कि उसके संभावित निशानों में समुद्र के नीचे बिछे केबल और डेटा सेंटर जैसी बुनियादी सुविधाएं शामिल हो सकती हैं।
अमेरिका क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी को और मजबूत कर रहा है, जिसके तहत तीसरा विमानवाहक पोत और हजारों अतिरिक्त सैनिक तैनात किए जा रहे हैं। यह तैनाती पश्चिम एशिया में दशकों में अमेरिकी युद्धपोतों और विमानों के सबसे बड़े जमावड़े का हिस्सा है।
मध्यस्थ अमेरिका और ईरान को औपचारिक वार्ता की मेज पर वापस लाने का प्रयास कर रहे हैं। ईरान ने एक सप्ताह के भीतर युद्ध समाप्त करने और होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह से खोलने का प्रस्ताव दिया है, बशर्ते अमेरिका उसकी शर्तें मान ले, जिनमें ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी हटाना, तेल निर्यात पर प्रतिबंधों में ढील देना, जब्त संपत्तियों को मुक्त करना और सभी मोर्चों पर दुश्मनी खत्म करना शामिल है।
जून में हुआ ऐसा ही एक समझौता कुछ ही दिनों में टूट गया था। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सितंबर के अंत में ईरान के नवीनतम सात-दिवसीय प्रस्ताव को खारिज कर दिया था, हालांकि दोनों पक्षों ने स्वीकार किया है कि अप्रत्यक्ष बातचीत जारी है।
द न्यू यॉर्क टाइम्स ने अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बुधवार को रिपोर्ट दी कि अमेरिका और इजरायल ने तीन नवंबर को होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के बाद ईरान पर नए सिरे से हमलों की योजना तैयार की है।
रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों देशों ने एक संभावित ‘छोटे लेकिन गहन अभियान’ से पहले सैन्य अभ्यास बढ़ा दिए हैं, जिसमें हमले के अभ्यासों का अनुकरण करने के लिए ईरान के पास इजरायली विमानों की उड़ानें शामिल हैं।
संभावित निशानों में ईरानी परमाणु ठिकाने, ऊर्जा ढांचा और मिसाइल एवं ड्रोन के भंडार शामिल बताए जा रहे हैं। हालिया रिपोर्टों से पता चलता है कि श्री नेतन्याहू फिर से हमले शुरू करने के पक्ष में हैं, लेकिन श्री ट्रंप ने उन्हें रोक रखा है, जो अमेरिकी मध्यावधि चुनाव समाप्त होने तक इंतजार करना चाहते हैं।
श्री नेतन्याहू ने नए हमलों की चर्चा की रिपोर्टों को ‘गलत’ बताकर खारिज कर दिया और श्री ट्रंप के साथ अपनी बातचीत के विवरण का खुलासा करने से इनकार कर दिया। नौ अक्टूबर को श्री ट्रंप ने कहा था कि अमेरिका अमेरिकी चुनावों से पहले ईरान पर हमला नहीं करेगा।
एक अन्य रिपोर्ट में कहा गया है कि श्री जमीर ने अमेरिकी जनरलों को चेतावनी दी थी कि आने वाले हफ्तों में हमला इजरायल को अपने 27 अक्टूबर के चुनाव स्थगित करने पर मजबूर कर सकता है, क्योंकि जवाब में ईरान इजरायल पर भीषण मिसाइल हमला कर सकता है।
