आइची नागोया, 24 अक्टूबर (वार्ता) एशियाई पैरा खेलों के समापन समारोह में एथलीट, अधिकारी और गणमान्य व्यक्ति खेलों के समापन के अवसर पर एक साथ आए। एशियन पैरालंपिक कमिटी के अध्यक्ष माजिद राशद ने खेलों के समापन की घोषणा की। उन्होंने पूरे एशिया में पैरा स्पोर्ट्स की बढ़ती ताकत और एक अधिक समावेशी समाज बनाने में इसकी भूमिका पर जोर दिया।
जापान की प्रधानमंत्री सनाए तकाइची ने भी एथलीटों के दृढ़ संकल्प, टीम वर्क और खेल भावना की सराहना की। उन्होंने उनके प्रदर्शन को पैरा स्पोर्ट्स की “गहरी सुंदरता” की याद दिलाने वाला बताया।
एशियन पैरा गेम्स की शुरुआत 2010 में चीन के ग्वांगझू में हुई थी। यह आयोजन ‘फार ईस्ट एंड साउथ पैसिफिक गेम्स फेडरेशन फॉर द डिसेबल्ड’ से विकसित होकर आज इस रूप में पहुंचा है। आइची-नागोया संस्करण इस आयोजन का पांचवां चरण था, जबकि 2030 में छठा संस्करण कतर के दोहा में आयोजित किया जाएगा।
भारत के लिए, यह समापन समारोह एक ऐतिहासिक अभियान के अंत का प्रतीक रहा। इस अभियान ने न केवल देश के लिए पदकों का नया मानक स्थापित किया, बल्कि पैरा-स्पोर्ट्स आंदोलन की गहराई और बढ़ती ताकत को भी दुनिया के सामने रखा।
भारत ने 30 स्वर्ण, 35 रजत और 49 कांस्य पदक सहित कुल 114 पदक जीतकर इन खेलों में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। भारत ने हांगझोउ में पिछले संस्करण के 108 पदकों (जिसमें 27 स्वर्ण, 32 रजत और 49 कांस्य पदक शामिल थे) के आंकड़े को पीछे छोड़ दिया है। भारत ने असल में 111 पदक जीते थे, लेकिन नीरज यादव और परवीन पर डोपिंग के आरोप लगने के कारण उनसे तीन पदक वापस ले लिए गए।
समापन समारोह में, निशाद कुमार और मोना अग्रवाल भारत के दल का नेतृत्व करते हुए ध्वजवाहक थे।
हमेशा की तरह, कुल पदकों में से आधे से ज़्यादा पदक पैरा एथलेटिक्स से आए। भारतीय पैरा एथलेटिक्स टीम ने कुल 65 पदक जीते, जिनमें 22 स्वर्ण, 19 रजत और 24 कांस्य पदक शामिल हैं। यह पिछले संस्करण की तुलना में 12 पदक ज़्यादा हैं, जब पैरा एथलेटिक्स टीम ने कुल 53 पदक जीते थे (बाद में तीन पदक वापस ले लिए गए थे)।