नई दिल्ली | भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) ने टेलीकॉम कंपनियों के लिए ‘अकाउंटिंग सेपरेशन’ और ‘कॉस्ट रिपोर्टिंग’ नियमों में बड़ा संशोधन करते हुए उद्योग जगत को बड़ी राहत दी है। नियामक ने उस विवादित प्रस्ताव को वापस ले लिया है, जिसमें गलत रिपोर्टिंग पर कंपनी के कुल टर्नओवर का 1 प्रतिशत जुर्माना लगाने की बात कही गई थी। इसके स्थान पर अब एक नया ‘ग्रेडेड पेनल्टी फ्रेमवर्क’ लागू किया गया है, जिसके तहत उल्लंघन की गंभीरता और कंपनी की सालाना कमाई के आधार पर जुर्माने की अधिकतम सीमा तय की गई है। इस फैसले से रिलायंस जियो और भारती एयरटेल जैसी बड़ी कंपनियों को टर्नओवर आधारित भारी वित्तीय जोखिम से सुरक्षा मिलेगी।
नए नियमों के अनुसार, टेलीकॉम कंपनियों को उनके सालाना टर्नओवर के आधार पर तीन अलग-अलग श्रेणियों में विभाजित किया गया है। 500 करोड़ रुपये तक के टर्नओवर वाली छोटी कंपनियों के लिए अधिकतम जुर्माना 50 लाख रुपये तय किया गया है। वहीं, 500 से 5,000 करोड़ रुपये तक के टर्नओवर वाली मध्यम श्रेणी की कंपनियों पर गंभीर उल्लंघन के लिए 1 करोड़ रुपये तक का दंड लग सकेगा। 5,000 करोड़ रुपये से अधिक टर्नओवर वाली दिग्गज कंपनियों के लिए मामूली उल्लंघन पर 1 करोड़ और अत्यंत गंभीर मामलों में अधिकतम 5 करोड़ रुपये तक की पेनाल्टी का प्रावधान किया गया है, जो पहले के टर्नओवर आधारित प्रस्ताव से काफी कम है।
TRAI ने वित्तीय रिपोर्टिंग के साथ-साथ टैरिफ प्लान की जानकारी देने में होने वाली देरी पर भी नए नियम स्पष्ट किए हैं। अब किसी भी नए टैरिफ प्लान को लॉन्च करने के सात कार्य दिवसों के भीतर उसकी जानकारी नियामक को देना अनिवार्य होगा। इसमें देरी करने पर कंपनियों को पहले सात दिनों के लिए 10,000 रुपये प्रति दिन और उसके बाद 20,000 रुपये प्रति दिन का जुर्माना देना होगा, जिसकी अधिकतम सीमा 5 लाख रुपये प्रति उल्लंघन रखी गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन संशोधनों से टेलीकॉम सेक्टर में ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को बढ़ावा मिलेगा और नियामक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता के साथ-साथ स्पष्टता भी आएगी।

