अनूपपुर जंक्शन पर रेल जनसंवाद बना फोटो सेशन

अनूपपुर, रेलवे बोर्ड की मंशा यात्रियों की समस्याएं सुनने और रेल सुविधाओं में सुधार की है, लेकिन अनूपपुर जंक्शन पर ‘पैन इंडिया रेल जनसंवाद’ अभियान की तस्वीर इसके उलट नजर आई। 22 अक्टूबर को आयोजित इस कार्यक्रम में न स्थानीय पत्रकारों को बुलाया गया, न जनप्रतिनिधियों को और न ही स्टेशन की बदहाल सुविधाओं को लेकर लगातार आवाज उठाने वाले जागरूक नागरिकों को। आरोप है कि रेलवे कर्मचारियों से औपचारिक मुलाकात और फोटो सेशन के जरिए कार्यक्रम की खानापूर्ति कर दी गई। ऐसे में सवाल है जब जनता को ही संवाद से बाहर रखा गया, तो यह रेल जनसंवाद किसके लिए आयोजित किया गया था…?

*जिम्मेदारी तय, लेकिन जवाबदेही कहां?*

बिलासपुर मंडल के एडीआरएम जामन शंकर मीणा को अनूपपुर जंक्शन में कार्यक्रम का प्रभारी बनाया गया था। स्थानीय स्तर पर स्टेशन मास्टर एम.पी. शर्मा और कमर्शियल इंस्पेक्टर एन.के. सिंह को आयोजन प्रभावी ढंग से संपन्न कराने की जिम्मेदारी दी गई थी। इसके बावजूद कार्यक्रम में वास्तविक जनभागीदारी सुनिश्चित नहीं किए जाने को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।

रेलवे बोर्ड के अभियान का उद्देश्य यात्रियों से सीधा संवाद, उनकी शिकायतों का संकलन और सुविधाओं में सुधार के लिए सुझाव प्राप्त करना था। लेकिन यदि आयोजन में आम यात्रियों, स्थानीय मीडिया और जनप्रतिनिधियों की सहभागिता ही सुनिश्चित नहीं की गई, तो अभियान की उपयोगिता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

क्या संबंधित अधिकारियों ने जनसंवाद को केवल औपचारिक कार्यक्रम समझ लिया, या फिर असुविधाओं से जुड़े तीखे सवालों से बचने के लिए सहभागिता सीमित रखी गई? इन सवालों का जवाब मंडल रेल प्रशासन को देना चाहिए।

*स्टेशन पर समस्याओं का अंबार, जनसंवाद में चर्चा तक नहीं!*

अनूपपुर जंक्शन महत्वपूर्ण रेल संपर्क केंद्र होने के बावजूद कई बुनियादी सुविधाओं को लेकर सवालों के घेरे में है। जनसंवाद इन समस्याओं को अधिकारियों के सामने रखने का बेहतर अवसर था, लेकिन आरोप है कि इसका लाभ यात्रियों को नहीं मिल सका।

ये हैं अनूपपुर जंक्शन की प्रमुख समस्याएं

सर्कुलेटिंग एरिया में शौचालय का अभाव, स्टेशन आने-जाने वाले यात्रियों को बुनियादी सुविधा का अभाव,

प्लेटफार्म नंबर 3 और 4 पर बुनियादी सुविधाओं की कमी, 

प्लेटफार्मों पर अधूरे शेड के कारण यात्रियों को धूप और बारिश में परेशानी होती है, लंबी दूरी से आने-जाने वाले यात्रियों के लिए प्रतिक्षालय मे स्नानागार ना होना, प्लेटफार्म नंबर 1 से प्लेटफार्म नंबर 3 और 4 की ओर जाने के लिए फुटओवर ब्रिज निर्माण कार्य लगभग एक वर्ष से बंद होने की बात सामने आ रही है। इससे यात्रियों की आवाजाही की सुविधा प्रभावित होने का सवाल उठता है, यात्रियों की जरूरत के अनुरूप आरक्षण सुविधा के समय की समीक्षा करते हुए आरक्षण का समय बढ़ाए जाने की आवश्यकता है,

महत्वपूर्ण ट्रेनों के ठहराव की मांग तथा अनारक्षित कोचों में भीड़ जैसे मुद्दों पर भी ठोस चर्चा अपेक्षित थी।

इन समस्याओं को लेकर स्थानीय नागरिक और रेल यात्री लंबे समय से सुविधाओं में सुधार की अपेक्षा कर रहे हैं। ऐसे में जनसंवाद के दौरान उनकी राय लेना और शिकायतों को आधिकारिक रूप से दर्ज करना जरूरी था।

*अभियान की सफलता फोटो से नहीं, समाधान से तय होगी*

रेलवे प्रशासन की किसी भी जनहितकारी पहल की सफलता इस बात से तय होती है कि उससे यात्रियों को कितना लाभ मिला। केवल कार्यक्रम आयोजित कर तस्वीरें जारी कर देना पर्याप्त नहीं है। शिकायतें दर्ज होना, उनके निराकरण की समयसीमा तय होना और कार्रवाई की समीक्षा होना भी उतना ही आवश्यक है।

अनूपपुर में यदि कार्यक्रम को वास्तविक जनभागीदारी से नहीं जोड़ा गया, तो यह रेलवे की अच्छी पहल को जमीनी स्तर पर कमजोर करने जैसा है। स्थानीय मीडिया और जागरूक नागरिकों को शामिल करने से न केवल समस्याओं की वास्तविक स्थिति सामने आती, बल्कि समाधान के लिए प्रशासन पर जवाबदेही भी तय होती।

*बिलासपुर मंडल जवाब दे कितनी शिकायतें दर्ज हुईं…?*

अब बिलासपुर मंडल के वरिष्ठ अधिकारियों के सामने कई महत्वपूर्ण सवाल हैं,अनूपपुर जंक्शन में जनसंवाद के दौरान कितने आम यात्रियों से वास्तविक चर्चा की गई?कितनी शिकायतें और सुझाव आधिकारिक रूप से दर्ज किए गए…?

स्थानीय पत्रकारों, जनप्रतिनिधियों और जागरूक नागरिकों को आमंत्रित क्यों नहीं किया गया…?

प्लेटफार्मों की सुविधाओं, शौचालय, वेटिंग हॉल और अधूरे फुट ओवरब्रिज जैसे मुद्दों के समाधान की क्या समयसीमा तय की गई?

क्या आयोजन की समीक्षा कर संबंधित अधिकारियों से जवाबदेही तय की जाएगी?

रेलवे प्रशासन को इन सवालों पर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए और कार्यक्रम में प्राप्त शिकायतों तथा प्रस्तावित कार्रवाई का विवरण सार्वजनिक करना चाहिए।

जनता की समस्याएं सुनने के नाम पर जनता को ही दूर रखना जनसंवाद की मूल भावना के विपरीत है। अनूपपुर जंक्शन पर आयोजित कार्यक्रम की निष्पक्ष समीक्षा और लंबित यात्री सुविधाओं पर ठोस कार्रवाई ही यह साबित करेगी कि रेलवे प्रशासन यात्रियों की परेशानियों को लेकर वास्तव में गंभीर है या अभियान केवल कागजी उपलब्धि बनकर रह गया।

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