मिस्र ने रक्षात्मक सहायता देने की अपनी तत्परता जताई है, जबकि क्षेत्रीय अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि तनाव बढ़ने से खाड़ी देशों की सुरक्षा और समुद्री व्यापार के अहम रास्ते खतरे में पड़ सकते हैं। राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी की अध्यक्षता वाली मिस्र की राष्ट्रीय रक्षा परिषद ने सऊदी अरब के साथ पूरी एकजुटता जाहिर की है। परिषद का कहना है कि सऊदी अरब की सुरक्षा, मिस्र और पूरे अरब जगत की सुरक्षा से जुड़ी हुई है।
परिषद ने सऊदी अरब के क्षेत्र, संसाधनों और स्थिरता की रक्षा के लिए हरसंभव मदद देने का वादा किया है। इसके साथ ही तनाव कम करने और क्षेत्रीय संकटों का समाधान खोजने के लिए क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ मिलकर कूटनीतिक प्रयास करने का आह्वान किया है।
अल-सीसी ने संसद का एक आपातकालीन सत्र बुलाया है, ताकि उन्हें सऊदी अरब की मदद के लिए जरूरी कदम उठाने की अनुमति मिल सके, अगर रियाद उनसे ऐसी कोई मांग करता है। संसद में इस पर चर्चा रविवार से शुरू हुई है, जो कई दिनों तक चलने की उम्मीद है।
यमन की राष्ट्रपति नेतृत्व परिषद के अध्यक्ष रशाद अल-अलीमी ने मिस्र के इस रुख का स्वागत किया है। उन्होंने काहिरा और रियाद के बीच की एकजुटता को क्षेत्रीय सुरक्षा की नींव बताया। उन्होंने यमन में सरकारी संस्थानों को बहाल करने और सरकार का अधिकार फिर से स्थापित करने के लिए भी समर्थन मांगा है।
खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) के महासचिव जासेम मोहम्मद अल-बुदैवी ने कहा कि सऊदी अरब की सुरक्षा, खाड़ी देशों की सामूहिक सुरक्षा व्यवस्था का एक अहम हिस्सा है। उन्होंने कहा कि सदस्य देश अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार सऊदी अरब की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए उठाए जाने वाले कदमों का समर्थन करते हैं।
तनाव बढ़ने के साथ ही हूतियों को ईरान द्वारा दी जा रही सैन्य मदद पर भी फिर से सवाल उठने लगे हैं। हूती गुट 2014 से यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार के खिलाफ लड़ रहा है और लगातार सऊदी अरब के इलाकों को निशाना बना रहा है। मीडिया रिपोर्टों में आरोप लगाया गया है कि ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने हूतियों को प्रशिक्षण, खुफिया जानकारी, रणनीतिक मार्गदर्शन और मिसाइल व ड्रोन हमलों में इस्तेमाल होने वाली तकनीक मुहैया कराई है। तेहरान और हूतियों ने ईरान की संलिप्तता के इन आरोपों से इनकार किया है।
‘द वॉल स्ट्रीट जर्नल’ की रिपोर्ट के अनुसार ईरान की ‘महान एयर’ की उड़ानों के जरिए आईआरजीसी के कर्मियों, ड्रोन के पुर्जों, मिसाइल गाइडेंस सिस्टम और अन्य सैन्य उपकरणों को यमन पहुंचाया गया। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ईरानी अधिकारियों ने ज़मीनी स्तर पर हूती अभियानों का निर्देशन करने में मदद की थी।
यमन की संसद के अध्यक्ष सुल्तान अल-बरकानी ने मिस्र से आग्रह किया कि वह लाल सागर, बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य और स्वेज नहर की सुरक्षा के लिए एक साझा अरब रुख का समर्थन करे। उन्होंने कहा कि इनकी सुरक्षा करना पूरे क्षेत्र की सामूहिक ज़िम्मेदारी है।
ये जलमार्ग वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इनमें किसी भी तरह की लंबी रुकावट आने से एशिया, यूरोप और मध्य पूर्व के बीच शिपिंग की लागत, आपूर्ति श्रृंखला और व्यावसायिक आवाजाही पर असर पड़ सकता है।