
विंध्य की डायरी
डॉ संजय पयासी
सियासी चौसर में अमूमन शह और मात का खेल खेलने वाले जब खुलकर आमने-सामने जुबानी जंग शुरू कर दे तो यह संकेत पार्टी के अंदर चल रही कलह की ओर इशारा करता है. पिछले दिनों सतना में जनविश्वास शिविर के दौरान नगरनिगम के सियासी अखाड़े में कुछ ऐसा ही देखने को मिला. राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी,महापौर योगेश ताम्रकार के अलावा जिले के आला प्रशासनिक अमले के सामने सांसद गणेश सिंह ने जो कहा वह किसी से छिपा नहीं है. उपलब्धियों के पैमाने की चर्चा करते हुए उन्होंने जनप्रतिनिधियों को यह भी सबक सिखाया कि लोकतंत्र में सब की जबावदेही तय होती है. जनता की अदालत में स्वयं के प्रयासों से हासिल की गई उपलब्धि ही आंकी जाती है. शेष कही गई सारी बातें अर्थविहीन होती है. उन्होंने नसीहत का पाठ पढ़ाते हुए यह भी कहा कि अगर कोई एक काम ठीक से नहीं हो पाया तो चार दूसरे अच्छे काम की चर्चाओं पर पूर्णविराम नही लगाया जाना चाहिए. लोगों के बीच उन कामों की भी बात कहीं जानी चाहिए.
पूर्व विधायक की सक्रियता के मायने क्या?
सीधी के पुराने सोनांचल बस स्टैंड को बंद किए जाने के मसले पर पूर्व विधायक पं केदारनाथ शुक्ल के उतरने से क्षेत्र की सियासत गरमा गई है . खुलकर आन्दोलनकारी व्यापारी,नेता और समाजसेवियों से यह कहना कि करीब 35 साल पुराना (1991 में निर्मित) यह सोनांचल बस स्टैंड अभी भी पूरी तरह उपयोग के लायक है और इसकी आयु 100 वर्ष बताई गई थी , नई रणनीतिक बिसात की ओर इशारा कर रही है. उनका यह विरोध उन प्रयासों पर पानी फेर सकता है जिसमें पुराने बस स्टैंड को व्यावसायिक गतिविधियों का केंद्र बनाए जाने की कल्पना शामिल हैं. उन्होंने ‘बस स्टैंड बचाओ -व्यापार बचाओ आंदोलन’ में बीजेपी, कांग्रेस, बसपा समेत सभी राजनीतिक दलों और व्यापारी संगठन ,नागरिकों को दलगत राजनीति से ऊपर उठकर जुड़ने का आह्वान भी किया है।पिछले विधानसभा चुनाव में रणनीतिक रूप से राजनीति के नेपथ्य में भेज दिए गए विधायक की सक्रियता भारतीय जनता पार्टी को हजम नही हो रही है. चर्चा यह भी है कि यह सक्रियता प्रदेशाध्यक्ष के दौरे के बाद देखने को मिली है.ऐसा माना जा रहा है कि पुराने मित्र की कोई सलाह कारगर साबित हो रही है.
शिलापट्टिका के बहाने पूर्व विधायक ने निकाली भड़ास
भाजपा के अंदर गुटबाजी जो लम्बे समय से पनप रही थी वह अब सार्वजनिक तौर पर मंचों में दिखाई देने लगी है. शिलापट्टिका में नाम न होने और मंच पर उचित स्थान न मिलने के कारण त्योंथर से भाजपा के पूर्व विधायक श्यामलाल द्विवेदी का गुस्सा फूट पड़ा. अपने ही पार्टी के वर्तमान विधायक सिद्धार्थ तिवारी पर भडक़ गये और पार्टी की मर्यादा को तार-तार करते हुए जमकर भड़ास निकाली. दरअसल त्योंथर तहसील के भवन लोकार्पण कार्यक्रम के दौरान शिलापट्टिका में नाम न होने के कारण पूर्व विधायक नाराज हो गये और समर्थकों ने नारेबाजी शुरू कर दी. किसी तरह से सांसद जनार्दन मिश्रा ने समझाइश देकर मामला शांत कराया. वही विधायक सिद्धार्थ तिवारी चुपचाप लोकार्पण पूजा में बैठे रहे और पूर्व विधायक चिल्लाते हुए अपना कड़ा विरोध जताते रहे. असल में टिकट कटने के बाद से ही पूर्व विधायक खेमेबाजी के साथ अलग-थलग हैं और समय-समय पर मौका मिलते ही किसी न किसी बहाने से अपनी भड़ास निकालते रहते है. जिस तरह से लोकार्पण कार्यक्रम में पूर्व विधायक ने पार्टी की किरकिरी की , पूरा मामला प्रदेश नेतृत्व तक पहुंच गया है. मंच के बजाय पार्टी फोमर में बात रखी जा सकती थी. लेकिन पूर्व विधायक ने सार्वजनिक तौर पर विवाद खड़ा कर पार्टी की मर्यादा को तार-तार करते हुए विपक्षी दलों को हमला करने का मौका दे दिया.
