नयी दिल्ली, 17 अक्टूबर (वार्ता) अखिल भारतीय छात्र संघ (आइसा) की अध्यक्ष नेहा बोरा को पुलिस हिरासत में रात बिताने के बाद शनिवार तड़के रिहा कर दिया गया, जबकि कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दिपके को शांति बांड भरने के बाद छोड़ दिया गया।
पुलिस ने दोनों को कनॉट प्लेस में प्रस्तावित ‘लहरा दो तिरंगा’ प्रदर्शन से पहले शुक्रवार को हिरासत में लिया गया था।
यह प्रदर्शन मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के विरोध और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर आयोजित किया जाना था।
रिहाई के बाद सुश्री बोरा ने दिल्ली पुलिस से प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए गये सभी लोगों को छोड़ने की मांग की। उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा कि लोकतंत्र और संविधान के लिए संघर्ष को अपराध नहीं बनाया जा सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने उचित कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया और उन्हें रातभर हिरासत में रखा। उन्हें मंडी हाउस से हिरासत में लिया गया था और दिल्ली पुलिस अधिनियम की धारा 65 के तहत औपचारिकताएं पूरी होने के बाद सुबह करीब पांच बजे रिहा किया गया।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि शुरुआत में उन्हें वकील से संपर्क करने की अनुमति नहीं दी गयी और उनके कानूनी दल को उन तक पहुंचने में पांच से छह घंटे लगे। सुश्री बोरा ने एसआईआर प्रक्रिया समाप्त करने, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के महाभियोग और हिरासत में मौजूद सभी प्रदर्शनकारियों की रिहाई की मांग की।
आइसा ने कहा कि वह इस प्रक्रिया के खिलाफ अपना अभियान जारी रखेगा।
इस बीच अभिजीत दिपके को आज भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 126 और 170 के तहत शुरू की गयी नयी निवारक कार्रवाई के सिलसिले में मंदिर मार्ग थाने में विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया गया।
दिल्ली पुलिस के अनुसार, श्री दिपके को 10 अक्टूबर को भरे गए शांति बांड के कथित उल्लंघन के आरोप में हिरासत में लिया गया था। बाद में उन्होंने नया शांति बांड भरा, जिसके बाद उन्हें रिहा कर दिया गया।
इससे पहले 10 अक्टूबर को श्री दिपके को दिल्ली हवाई अड्डे पर एक विमान से हिरासत में लिया गया था और एक वर्ष तक शांति बनाये रखने का आश्वासन देने को कहा गया था। सीजेपी की कानूनी मामलों की प्रमुख रत्ना सिंह ने उनकी गिरफ्तारी की वैधता पर सवाल उठाते हुए कहा था कि नागरिकों से शांतिपूर्ण तरीके से तिरंगा फहराने की अपील करना अपने आप में अपराध नहीं हो सकता।
श्री दिपके शुक्रवार को राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के प्रवक्ता अनीश गवांडे के आवास से निकलते समय हिरासत में लिए गये थे। वह वहां रह रहे थे और कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में प्रस्तावित मार्च में शामिल होने जा रहे थे। पुलिस ने निषेधाज्ञा, यातायात बाधित होने, सार्वजनिक सुरक्षा और व्यावसायिक गतिविधियों पर असर पड़ने की आशंका का हवाला दिया था।
रिहाई के बाद दिपके ने एक्स पर बॉलीवुड फिल्म ‘वीर-जारा’ में शाहरुख खान के बुजुर्ग किरदार का संदर्भ देते हुए मजाकिया अंदाज में लिखा कि बिना वाई-फाई और फोन के 24 घंटे जेल में रहने के बाद बाहर निकलना कैसा लगता है।
दिपके को मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किए जाने के दौरान मंदिर मार्ग थाने के बाहर भी तनाव की स्थिति बनी। पुलिस ने अदालत में प्रवेश करने वाले वकीलों की संख्या सीमित कर दी, जिसके बाद बैरिकेड पार करने की कोशिश कर रहे अधिवक्ताओं और पुलिस के बीच टकराव हुआ।
सीजेपी के कार्यकर्ता सौरव दास और आशुतोष रांका जंतर-मंतर क्षेत्र में प्रवेश करने की कोशिश के बाद अब भी न्यायिक हिरासत में हैं।
दिल्ली पुलिस ने बताया कि शुक्रवार के प्रदर्शनों के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने और यातायात सुचारु रखने के लिए करीब 150 लोगों को हिरासत में लिया गया था। सेंट्रल पार्क की घेराबंदी की गयी थी और कनॉट प्लेस तथा आसपास के इलाकों में रैपिड एक्शन फोर्स सहित अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किये गये थे।
इस बीच रिवोल्यूशनरी वर्कर्स पार्टी ऑफ इंडिया और क्रांतिकारी युवा संगठन सहित वामपंथी संगठनों ने एसआईआर के विरोध में शनिवार को रायसीना रोड पर प्रदर्शन किया और मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग की। मध्य दिल्ली में प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए भारी बैरिकेडिंग और दंगा नियंत्रण बल तैनात किये गये।
