ग्रेटर नोएडा में दो अवैध ड्रग लैब का भंडाफोड़, दो गिरफ्तार

ब्यूरो ने शनिवार को एक विज्ञप्ति जारी कर बताया कि यह कार्रवाई शुक्रवार को की गयी। दोनों लैब किराये की जगहों पर चल रही थीं, जहां सिंथेटिक ड्रग्स बनाने और उनकी प्रोसेसिंग का काम किया जा रहा था। कार्रवाई में 379.740 किलो एम्फेटामिन युक्त सामग्री और 10 किलो स्यूडोएफेड्रिन बरामद किया गया। जब्त सामग्री से करीब 56 किलो तैयार क्रिस्टलीय एम्फेटामिन बनायी जा सकती थी, जिसकी अवैध बाजार में अनुमानित कीमत करीब 45 करोड़ रुपये है।

विज्ञप्ति के मुताबिक, बरामद एम्फेटामिन युक्त सामग्री में 4.260 किलो क्रिस्टलीय, 157.700 किलो अर्ध-क्रिस्टलीय और 217.780 किलो तरल पदार्थ शामिल है। इसके अलावा, लैब से हाइड्रोक्लोरिक एसिड, एसीटोन, टोल्यून, सल्फ्यूरिक एसिड और पोटैशियम परमैंगनेट समेत बड़ी मात्रा में रसायन भी मिले हैं। इन रसायनों का इस्तेमाल मेथामफेटामिन बनाने में किया जाता है।

इस मामले में गिरफ्तार आरोपियों की पहचान डेस्टिनी अब्राहम डुमबिरी और मिजोरम की रहने वाली लल्लावमजुआली उर्फ ओलिविया लालछाविमावी के रूप में हुई है। डुमबिरी ने खुद को नाइजीरियाई नागरिक बताया था। इमिग्रेशन रिकॉर्ड के अनुसार हालांकि वह जनवरी 2020 में फ्रांसिस कालोकोह नाम से सिएरा लियोन के नागरिक के रूप में पर्यटक वीजा पर भारत आया था। उसका वीजा दिसंबर 2020 तक वैध था।

एनसीबी के मुताबिक, अलग-अलग पहचान का इस्तेमाल कर जांच एजेंसियों को गुमराह करने की आशंका की जांच की जा रही है।

दूसरी आरोपी ओलिविया को गत मार्च में गोवा के डाबोलिम एयरपोर्ट पर 313 ग्राम हेरोइन युक्त पाउडर मिलने के मामले में डायरेक्टरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस ने गिरफ्तार किया था। यह बरामदगी उसके चेक-इन सामान से हुई थी। वह फिलहाल उस मामले में जमानत पर है।

एनसीबी को दोनों ठिकानों पर बड़े पैमाने पर रसायनों की प्रोसेसिंग के इंतजाम मिले। इनमें बड़े हीटिंग उपकरण, कांच के रिएक्शन वेसल, रसायन रखने के ड्रम, फिल्टर करने के उपकरण, वजन मापने वाली मशीनें, रेस्पिरेटर और अन्य लैब उपकरण शामिल हैं।

एनसीबी ने अक्टूबर 2024 में गौतम बुद्ध नगर के कासना औद्योगिक क्षेत्र में भी सिंथेटिक ड्रग बनाने वाली एक अवैध लैब का भंडाफोड़ किया था। उस कार्रवाई में ठोस और तरल रूप में करीब 95.5 किलो सिंथेटिक ड्रग्स जब्त की गयी थी।

ब्यूरो अब मौजूदा मामले में पैसों के लेन-देन, रसायनों की खरीद और ड्रग्स की सप्लाई से जुड़े नेटवर्क की जांच कर रहा है। एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस नेटवर्क को पैसा कौन दे रहा था, रसायनों की आपूर्ति कौन कर रहा था और ड्रग्स बनाने में तकनीकी मदद देने वाले तथा अन्य सहयोगी कौन हैं। मामले में और गिरफ्तारियां होने की संभावना के साथ अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय संबंधों की भी जांच की जा रही है।

ब्यूरो ने लोगों से अपील की है कि किराये के मकानों, औद्योगिक परिसरों या अन्य जगहों पर चल रही संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखें। असामान्य रासायनिक गंध, रसायनों के ड्रम या लैब उपकरणों की बार-बार आवाजाही और रासायनिक कचरे के संदिग्ध भंडारण या निपटान जैसी गतिविधियों की सूचना राष्ट्रीय नारकोटिक्स हेल्पलाइन मानस-1933 पर दें।

ब्यूरो ने कहा कि ऐसी अवैध लैब से निकलने वाला रासायनिक कचरा मिट्टी, नालों और जलस्रोतों को दूषित कर सकता है, जिससे लोगों के स्वास्थ्य और पर्यावरण को गंभीर खतरा पैदा होता है। एजेंसी ने मकान मालिकों, प्रॉपर्टी डीलरों, हाउसिंग सोसायटियों, रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशनों और सुरक्षा कर्मियों से संदिग्ध गतिविधियों की सूचना तुरंत देने की अपील की है।

 

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